
अधिक से अधिक लोगों की जिंदगी बचाने वाली इन नई तकनीकों के बारे में जानते हैं-
इलाज की नई तकनीक से मरीजों को अधिक फायदा हो रहा है। आंकड़ों की बात करें तो अकेले भारत में ही हर साल एक लाख से अधिक हार्ट सर्जरी होती हैं। हार्ट से जुड़ी नई तकनीकों से इलाज की राह तेजी से आसान हुई है। तकलीफ में राहत के साथ पैसा और समय भी बच रहा है। इलाज की अवधि भी काफी कम हुई है। अधिक से अधिक लोगों की जिंदगी बचाने वाली इन नई तकनीकों के बारे में जानते हैं-
तावी -
हृदय के वॉल्व सिकुड़ने, लीक करने के कारण वॉल्व बदलना ही विकल्प था। अब तावी (ट्रांसकैथेटर ऑरटिक वॉल्व इम्प्लान्टेशन) से बिना चीर-फाड़ व बेहोशी के पैर की नस के रास्ते एंजियोप्लास्टी की तरह हार्ट के वॉल्व को बदलते हैं। अधिक उम्र के मरीजों में भी कारगर है।
सीआरटी-डी -
जिन मरीजों के हृदय की पम्पिंग क्षमता स्थाई रूप से कमजोर हो चुकी है। उनके लिए यह बेहतर विकल्प है। ऐसे मरीजों को कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन कराते हैं। यह हार्ट पम्पिंग क्षमता बढ़ाने वाला पेशमेकर है।
लीड लेस पेसमेकर-
यह कैप्सूल के आकार का होता है। यह सामान्य पेसमेकर से 93% छोटा है। टाइटेनियम का बना होने से संक्रमण की आंशका कम रहती है। जिस तरह एंजियोप्लास्टी में धमनी के माध्यम से स्टेंट डालते हैं उसी तरह यह पेसमेकर भी लगाया जाता है।
पीडियाट्रिक डिवाइस -
हृदय में छेद का इलाज अब बिना ऑपरेशन के संभव है। मरीज के पैरों की नसों से पीडियाट्रिक डिवाइस हृदय तक पहुंचाते हैं। जालियों के बीच छोटे-छोटे बॉल डालकर हृदय के छेद बंद करते हैं। ये प्रकिया बिना चीर-फाड़ के थोड़ी देर में हो जाती है। अगले दिन मरीज की छुट्टी हो जाती है।
रोटाब्लेशन -
पहले जिन मरीजों की हृदय धमनियों में कैल्शियम अधिक होता था। उन्हें एंजियोप्लास्टी से स्टेंट लगाने में परेशानी होती थी। ऐसे मरीजों की बायपास सर्जरी होती थी। अब रोटाब्लेशन तकनीक सेड्रिलिंग कर कैल्शियम व वसा कुछ देर में ही बाहर निकाल देते हैं।
Updated on:
29 Sept 2019 06:23 pm
Published on:
29 Sept 2019 06:23 pm
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