जानिए जमीन पर सोने के लाभ और भोजन के सेवन का सही समय व तरीका

जानिए जमीन पर सोने के लाभ और भोजन के सेवन का सही समय व तरीका
महीने में 1-2 बार जमीन पर सोने से तंत्रिकाओं में होने वाला दर्द दूर होता है जिससे शारीरिक-मानसिक संतुलन बना रहता है। ज्यादा मोटाई वाला तकिया प्रयोग में न लें।

Vikas Gupta | Updated: 05 Oct 2019, 03:02:06 PM (IST) तन-मन

महीने में 1-2 बार जमीन पर सोने से तंत्रिकाओं में होने वाला दर्द दूर होता है जिससे शारीरिक-मानसिक संतुलन बना रहता है। ज्यादा मोटाई वाला तकिया प्रयोग में न लें।

शास्त्रों में जमीन पर सोने के कई फायदे बताए हैं। इससे तनाव दूर होता है और जोड़ों में दर्द नहीं रहता। जमीन पर सोने से व्यक्ति के कंधों के साथ शरीर का निचला हिस्सा भी सीधा रहता है। जिससे शरीर में रक्तसंचार सुधरता है व पूरे दिन के लिए ऊर्जा बनी रहती है। जमीन पर सोने के दौरान कमर, कंधों व नसों में खिंचाव होने से इनकी अकड़न दूर होकर आराम मिलता है। महीने में 1-2 बार जमीन पर सोने से तंत्रिकाओं में होने वाला दर्द दूर होता है जिससे शारीरिक-मानसिक संतुलन बना रहता है। ज्यादा मोटाई वाला तकिया प्रयोग में न लें।

6 मील रूल से गैस्ट्रिक प्रॉब्लम दूर -

डायटीशियन के अनुसार कब्ज, गैस्ट्रिक व ब्लोटिंग की मूल वजह नाश्ता व डिनर को मेन मील की तरह लेना व दिनभर भूखे रहना या तलीभुनी चीजें खाना है। ऐसे में 6 मील रूल यानी दिन में 6 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें। इनमें फल व सब्जियां भरपूर खाएं। सुबह नाश्ते के बाद स्नैक्स और फिर 12 से 1 बजे के बीच लंच लें। 3-4 बजे चाय के साथ हल्का-फुल्का स्नैक्स लें और फिर 6 बजे सूखे मेवे ले सकते हैं। डिनर सोने से 2 घंटे पहले यानी 8 से 9 के बीच कर लेना चाहिए। मेन मील के बाद ग्रीन टी पी सकते हैं।

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