
40 की उम्र के बाद डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है।
40 की उम्र में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान सेहत के प्रति लापरवाही बीमारियों को खतरा बढ़ाती है।
इनपर गौर करें...
स्मोकिंग छोड़ें -
40 की उम्र के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले की तुलना में कम हो जाती है। ऐसे में सिगरेट, शराब, बीड़ी और गुटखा से दूरी बनाना बेहतर है। ये फेफड़ों के साथ दिल को भी बीमार बनाते हैं। पहले हृदय रोग 50 वर्ष से अधिक उम्र में होते थे। लेकिन अब 40 या इससे कम उम्र के लोगों का दिल भी बीमार है। इसका मुख्य कारण तनाव है।
महिलाएं सतर्क रहें -
उम्र के इस पड़ाव पर महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगते हैं और सेहत का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ खुद के लिए समय निकालें। शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर घटने से कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी जोड़ों में दर्द की तकलीफ बढ़ाती है। तनाव शारीरिक कमजोरी की वजह बनता है।
प्रमुख जांचें कराएं -
40 की उम्र पार करने के बाद कुछ प्रमुख जांचें डॉक्टरी सलाह पर समय-समय कराते रहना चाहिए। जैसे ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, लिपिड प्रोफाइल, एक्स-रे, हार्ट के लिए ईको टैस्ट, ईसीजी। आयुर्वेद में नाड़ी को देखकर और यूरिन टैस्ट से फिटनेस का पता करते हैं।
ये अपनाएं...
खाने में मूंग दाल का प्रयोग अधिक करें।
प्राणायम-सूर्यनमस्कार आपको फिट रखेगा।
सुबह दो घंट धूप में बैठकर बॉडी मसाज करें।
संतुलित आहार लेकर वजन नियंत्रित रखें।
बहुत अधिक तला-भुना भोजन न खाएं।
एलोपैथी -
फिट रहने के लिए सावधानी ही इलाज है। किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें। समय पर नियमित जांचें कराएं। रेगुलर एक्सरसाइज के साथ हैल्दी डाइट लें।
आयुर्वेद -
इस उम्र में जोड़ों में दर्द की तकलीफ दूर करने के लिए औषधियुक्त तेल से मालिश करें। जानुबस्ती भी उपयोगी है। शतावरी व बादाम रोजाना खाने से लाभ होता है।
होम्योपैथी -
40 की उम्र के बाद शरीर में आए बदलावों को पहचानें। चीनी, नमक और मसाले सीमित मात्रा में ही लें। कैल्शियम युक्त दूध व दही लेने से हड्डियां मजबूत होती हैं।
Published on:
22 Aug 2019 04:51 pm
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