मुझे नींद न आए...यानि खतरे की घंटी

युवा भारत की आंखों से नींद किसी ने चुरा ली है और ये चोर कोई और नहीं, बल्कि जिंदगी की आपाधापी है। ये चौंकाने वाली हकीकत है और कई सर्वेक्षणों में ये हैरतअंगेज हकीकत खुलकर सामने आई है। जी हां, कम नींद भी एक बीमारी है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे स्लीप डिसऑर्डर कहा जाता है। 68 फीसदी युवा पूरी तरह से नींद नहीं ले पा रहे हैं।

By: जमील खान

Published: 01 Dec 2020, 05:36 PM IST

युवा भारत की आंखों से नींद किसी ने चुरा ली है और ये चोर कोई और नहीं, बल्कि जिंदगी की आपाधापी है। ये चौंकाने वाली हकीकत है और कई सर्वेक्षणों में ये हैरतअंगेज हकीकत खुलकर सामने आई है। जी हां, कम नींद भी एक बीमारी है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे स्लीप डिसऑर्डर कहा जाता है। World Association Of Sleep Medicine के मुताबिक स्लीप डिसऑर्डर (Sleep Disorder) 80 तरह के होते हैं।

किसके लिए कितनी नींद मुफीद
तो सवाल ये है कि आखिर किसी इंसान के लिए कितनी नींद पर्याप्त होती है। अगर बात तुरंत जन्मे बच्चे की हो तो वे 22 घंटे तक सोते हैं जबकि कुछ वक्त बीतने के बाद इन्हें 18 से 16 घंटे की नींद की जरूरत होती है। टीनएजर को नौ घंटे, युवाओं को 7 से 8 घंटे तो गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को औसत से कई घंटे ज्यादा नींद की जरूरत होती है।

कम नींद शरीर का कर्ज
कम नींद शरीर के बैंक के अकाउंट में कर्ज की तरह होती है। शरीर नींद में कमी का हिसाब-किताब पूरा करना चाहता है अगर ये कमी पूरी नहीं होती तो जिस तरह कर्ज वापस न मिलने पर बैंक दिवालिया हो जाता है उसी तरह शरीर रुपी बैंक भी कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। शुरुआत तनाव और थकान जैसी छोटी बीमारियों से होती है। लंबे वक्त कम नींद का असर धीरे-धीरे दिमाग पर पड़ता है और याद करने की क्षमता कम होती है आगे चलकर इसका असर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र यानी रोगों से लडऩे की क्षमता पर भी पड़ता है और इंसान की बीमारियों से लडऩे की क्षमता कमजोर होती जाती है।

लोरी सुनाते स्मार्टफोन
जमाना स्मार्ट टेक्नोलॉजी का है ऐसे में तकनीकी खिलाडिय़ों ने कई एप्स भी बना डाले हैं। एप्पल ने नींद लाने के लिए स्लीप पिलो साउंड एप्स मार्केट में उतारा है। इस एप से ऐसी आवाजें निकलती हैं जो इंसान को नींद की आगोश में ले जाती हैं। दूसरी ओर एंड्रायड प्लेटफॉर्म पर इससे मिलता-जुलता एप स्पीलशेयर भी खूब डाउनलोड किया जाता है। ये ये भारत में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले टॉप टेन हैल्थ एप में शुमार हैं। लेकिन, फिलहाल चिकित्सा जगत इन एप को मान्यता नहीं देते।

कम नींद जानलेवा है
ए क अनुमान के मुताबिक भारत में करीब छह करोड़ युवा कम नींद के शिकार हैं। इनमें से ज्यादातर इसके लिए किसी तरह की डॉक्टरी सलाह नहीं लेते। ये शुरुआती लापरवाही गंभीर दिक्कत बन जाती है। अगर ध्यान न दिया जाता तो शरीर कई घातक बीमारियों की चपेट में आ सकता है और यहां तक ये जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा वक्त तक कम नींद से इंसान डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारियों या फिर ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ सकता है। कम नींद लेने वाली महिलाओं में तो पुरुषों की अपेक्षा इन बीमारियों की चपेट में आने का खतरा दोगुना होता है। खतरा यहां तक बढ़ चुका है कि दुनिया भर में कम नींद की वजह से होने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं उपलब्ध है।

अनिद्रा है खतरे की घंटी
कम नींद न सिर्फ पीडि़त की मौत की वजह है बल्कि दुनिया में इसके पीडि़त की वजह से हर साल लाखों लोग दम तोड़ देते हैं। कम नींद न सिर्फ बीमारियों से होने वाली मौतों की वजह है बल्कि दुनिया भर में सड़क हादसों से होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह भी नींद पूरी न होना है। दरअसल कम नींद का दिमाग पर इस कदर असर पड़ता है कि शरीर के अंगों को नियंत्रित करने वाले दिमाग और अंगो का तालमेल गड़बड़ा जाता है। ऐसे में कम नींद की वजह से दिमाग और हाथ-पैरों के तालमेल गड़बड़ाने की दशा में गाड़ी चला रहा शख्स एक्सीडेंट को न्योता दे बैठता है और कई मौतों की वजह बन जाता है। अगर ये खतरनाक हकीकत आपको परेशान कर रही है तो इस हकीकत से परेशान होकर अपनी नींद न उड़ाए, बल्कि अच्छी और पूरी नींद लेने की कोशिश करें। लेकिन अगर आप ठीक से सो नहीं पा रहे हैं तो इसे इग्नोर मत करिए। डॉक्टर की सलाह लीजिए वरना कहीं ऐसा न हो कि कम नींद आपकी जिंदगी पर भारी पड़ जाए।

जमील खान
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