
गूलर में औषधीय गुण भी मौजूद हैं। इसका पेड़ खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है। इसे जन्तुफल भी कहा जाता है। गूलर के फूल और फल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। जानते हैं इनके बारे में....

डाइट में इसके कच्चे फलों की सब्जी और पके फल को खाया जा सकता है। गूलर के पके फल का रस 20 ग्राम की मात्रा में गुड़ या शहद के साथ सेवन करने से रक्तस्राव रुक जाता है। खूनी बवासीर है तो गूलर के फलों को सुखाकर पीस लें। फिर इसमें चीनी मिलाकर लें।

निमोनिया हो जाने पर गूलर के फल को पानी में मिलाकर काढ़ा बनाएं और इसे रोगी को दें।

अगर डायबिटीज की समस्या है तो इसके फल को पीसें और पानी के साथ लें। ब्लड शुगर नियंत्रित होगा।

स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में शहद मिलाकर सेवन कराने से अत्यधिक बहाव रुक जाता है।

मुंह में छाले व मसूढ़ों से खून आने पर गूलर की छाल का काढ़ा लें सकते हैं।