
खाली पेट न करें। हृदय रोगी ज्यादा देर सांस न रोकें। पैरों में किसी प्रकार की चोट या पूर्व में कोई सर्जरी हुई है तो न करें। गर्भवती भी इसे न करें।
Utkatasana: Virabhadrasana: स्वस्थ होने के बावजूद यदि व्यक्ति की हड्डियां कमजोर हैं तो पूरे शरीर में असंतुलन की स्थिति बनती है। ऐसे में हल्की चोट से भी हड्डी के फे्रक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है। जानते हैं ऐसे योगासनों के बारे में जो हड्डियों को मजबूत रखने में मददगार हैं।
उत्कटासन: (Utkatasana) - इसे करने के दौरान व्यक्ति की मुद्रा कुर्सी के आकार जैसी होती है इसलिए इसे कुर्सी आसन या चेयर पोज भी कहते हैं। किसी भी उम्र का व्यक्ति इसे कर सकता है। जांघ, कमर व पेट की चर्बी कम होने से इन अंगों की मांसपेशी व हड्डियों में मजबूती मिलेगी। कब्ज व एसिडिटी में फायदेमंद है।
एेसे करें: सीधे खड़े होकर दोनों पैरों के बीच 6 इंच दूरी रखें। दोनों हाथों को कंधों के बराबर सामने की ओर रखें। धीरे-धीरे सांस लेते हुए घुटनों को मोड़ते हुए एेसी अवस्था में बैठें जैसे कुर्सी पर बैठे हों। हाथों को सिर के बराबर ऊपर ले जाएं व सामान्य सांस लें। क्षमतानुसार इस स्थिति में रुककर धीरे-धीरे सांस छोड़ें व प्रारंभिक अवस्था में आएं। इसे 3-4 बार दोहरा सकते हैं।
ध्यान रखें: खाली पेट न करें। हृदय रोगी ज्यादा देर सांस न रोकें। पैरों में किसी प्रकार की चोट या पूर्व में कोई सर्जरी हुई है तो न करें। गर्भवती भी इसे न करें।
वीरभद्रासन : (Virabhadrasana)
इस आसन की प्रमुख तीन विधियां होती हैं जिनमें आसन के दौरान मुद्रा बदल जाती है। इसकी शुरुआत में व्यक्ति को संतुलन बनाने में थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन नियमित अभ्यास से कंधे और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
1- सीधे खड़े होने के बाद दोनों पैरों के बीच कम से कम 3-4 फुट का गैप दें। दाएं पैर को हल्का सा घुटने से मोड़कर दाईं आेर ले आएं और बाएं पैर को सीधा पर तलवा जमीन से लगा होना चाहिए। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। इस दौरान दोनों हथेलियां एक-दूसरे के सामने हों। सामान्य सांस लेते हुए इस अवस्था में कुछ देर रुकें। सांस छोड़ते हुए शुरुआती अवस्था में आ जाएं। बाएं पैर से भी इसे दोहराएं।
2- इसकी दूसरी विधि में पैरों की स्थिति समान होगी केवल हाथ ऊपर के बजाय कंधे के बराबर होने चाहिए।
3- तीसरी विधि में दोनों पैरों पर खड़े होकर कमर से ऊपर के भाग को सामने की ओर 90 डिग्री की स्थिति में ले आएं। साथ ही दोनों हाथों को भी कान से छूते हुए सामने रखें। इस दौरान बाएं पैर को उठाते हुए ऊपरी हिस्से के बराबर ले आएं।
ध्यान रखें: हाई ब्लड पे्रशर, हृदय संबंधी रोग, कंधे व गर्दन में दर्द की समस्या में इसे आसन का अभ्यास न करें।
Published on:
01 Jul 2019 02:03 pm
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