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अब तक आपको नहीं होगा पता, ये पांच सीख देती हैं कामकाजी मां

मदर के रूप में जो कुछ भी अपनी बेटी को सिखा रही है, वह किताबी शिक्षा से कहीं ज्यादा महत्व रखता है।

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Pawan Kumar Rana

Dec 01, 2017

teachings for daughter

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अपने बच्चों और खासकर अपनी बेटी की परवरिश को लेकर कामकाजी मां हमेशा चिंतित नजर आती है लेकिन मां को घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाते देख बेटी खुद ही काफी कुछ सीख लेती है। वर्किंग मॉम अक्सर यह सोचती हैं कि वे अपनी बेटी को वे सभी स्किल्स सिखाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है, जो जीवन में सफउल होने के लिए जरूरी है। वह दिन के आठ घंटे से ज्यादा घर से बाहर रहती है और दूसरी मॉम की तरह अपनी बेटी को मैथ के टेस्ट और स्पेलिंग्स की तैयारी नहीं करवा सकती। लेकिन सच यह है कि एक वर्किंग मदर के रूप में जो कुछ भी अपनी बेटी को सिखा रही है, वह किताबी शिक्षा से कहीं ज्यादा महत्व रखता है।

पहली सीख: पैशन महत्वपूर्ण है
बेटी के शुरुआती सालों में ही उसकी रुचि पहचानी जा सकती है। हो सकता है अपनी रुचि को वह बड़ी होकर गंभीरता से न ले लेकिन कम से कम उसे यह पता होगा कि अपनी रुचि को प्रोफेशन में बदला जा सकता है। आज भी बहुत सी लड़कियां ऐसी हैं, जो समाज की उम्मीदों के चलते माइक्रोस्कोप की जगह लिपस्टिक को चुनती हैं। ऐसे में आप भले ही साइंस फील्ड में न हों लेकिन अपनी बेटी के लिए आप एक मिसाल हैं, जिसने अपने पैशन को कॅरियर में बदला।

दूसरी सीख: मां भी पिता जितनी सक्षम है
अब माता और पिता की अलग-अलग भागों में बंटी भूमिकाओं का अस्तित्व बदल रहा है और उनकी सख्त पालना में भी अब ढिलाई देखी जा सकती है। अब अकेले पिता पर आर्थिक जिम्मेदारियों का बोझ नहीं है। यह जिम्मेदारी मां भी उतनी ही गंभीरता से उठा रही है और घर की आय और निर्णय लेने में अपना बराबर का योगदान दे रही है। अपनी मां को ऐसा करते देख आपकी बेटी यह जान लेगी कि उसकी मां का महत्व पिता से कम नहीं है।


तीसरी सीख: घर दोनों की जिम्मेदारी
कामकाजी मां की बेटी होने के नाते वह अपने पिता को भी एक अलग दृष्टि से देख पाएगी, जो घर के काम बखूबी निभाते हैं। वह अपनी कामकाजी मां को देखकर यह समझ पाएगी कि समय की कमी के चलते वे घर के पूरे काम अकेले नहीं संभाल सकतीं और इसके लिए पति से मदद की उम्मीद रखती हैं। आप भी चाहती हैं कि आपकी बेटी यह व्यवस्था समझे और भविष्य में अपने पति से मदद की मांग करे। आखिरकार घर दोनों की जिम्मेदारी है।


चौथी सीख: किसी पर निर्भर नहीं होना
खुद की व घर की जरूरतों को स्वयं पूरा करने में मां को समर्थ देखकर निश्चित ही बेटी भी आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण पाठ सीखेगी। वह सीखेगी कि उसे भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। अपने पिता के साथ-साथ मां को घर के बिल भरते देख वह भी जानेगी कि आगे चलकर उसकी जरूरतों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए उसे खुद को सक्षम बनाना होगा और किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना होगा।

पांचवीं सीख:खुद चुनाव करना
आपको देखकर जो सबसे महत्वपूर्ण सीख आपकी बेटी सीखेगी, वह यह है कि जीवन में कौनसी राह चुननी है, इसका फैसला लेने का पूरा हक उसको है। वह घर पर रहकर अपने बच्चों की देखभाल करना चाहती है या कॅरियर बनाना चाहती है या दोनों के बीच का रास्ता चुनना चाहती है। उसे अपने सपने को पूरा करने की पूरी आजादी होगी और वह जो फैसला लेगी, अपनी खुशी के लिए लेगी। - अक्षमा गुप्ता