
योग का अर्थ चित्त वृत्ति निरोध यानी मन के चित्त की वृत्तियों को रोकता है एवं शरीर में आने वाले विकारों को दूर करता है। योग संस्कृत भाषा के युज शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है, जोडऩा। शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से जोडऩा। नियमित 30-40 मिनट योग-व्यायाम और ध्यान करना बीमारियों में भी कई तरह से लाभ पहुंचाता है। इसके बारे में बता रहे हैं जयपुर के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. दिलीप सारण।
तनाव कम करता: योग-ध्यान शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करते हैं। अधिकतर गंभीर यानी क्रॉनिक बीमारियों की प्रमुख वजह में तनाव भी एक है। जब शरीर और मन शांति महसूस करता है तो बीमारियों के बढऩे की आशंका कम होती है।
शारीरिक स्थिति में सुधार: योग आसन, प्राणायाम (श्वासायाम), मुद्राएं (हस्त-मुद्राएं), और शारीरिक व्यायाम के माध्यम से शरीर को मजबूत, सुव्यवस्थित, संतुलित बनाने में मदद करते हैं। इनसे शारीरिक ऊर्जा और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इनके नियमित अभ्यास से रोगों के दुष्प्रभाव को घटाया जा सकता है
बीमारियों के बाद भी उपयोगी है योग-ध्यान
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आहार भी प्रमुख:
योग-ध्यान के साथ सही आहार भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। अधिकतर बीमारियों की वजह खराब खानपान भी है।
इम्युनिटी बढ़ती: दवा के साथ नियमित योग-ध्यान से शरीर में इम्युनिटी बढ़ती है। इनसे शरीर में अधिक ऑक्सीजन भरती है। नए सेल्स बनते हैं। बीमारी तेजी से ठीक होती है।
संवेदनशीलता घटती है: गंभीर बीमारियों से संवेदनशीलता और चिंताएं बढ़ती हंै। जो शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं। योग-ध्यान मन की स्थिति को स्थिर कर संवेदनशीलता में मदद करती है।
भय भी कम होता: गंभीर बीमारियों में कई प्रकार का भय भी होता है। मृत्यु से भयग्रस्त व निराश होकर अर्जुन भी युद्ध नहीं करना चाहते थे। तब श्रीकृष्ण ने "योग: कर्मसु कौशलम्" बताते हुए कर्मयोग का ज्ञान देकर अर्जुन को चिंता व मृत्यु के भय से मुक्त किया था।
दवाइयों का दुष्प्रभाव घटता: कई ऐसे रिसर्च में देखा गया है कि कीमोथैरेपी आदि दवाओं का दुष्प्रभाव पड़ता है। ऐसे में योग-प्राणायाम करते हैं तो मन-स्थिति सकारात्मक होती है। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढऩे से दवा का दुष्प्रभाव भी घटता है। शरीर डिटॉक्स होता है। नई ऊर्जा भी मिलती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
23 Jun 2023 02:47 pm
Published on:
23 Jun 2023 02:46 pm
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