Goa Film Festival में आम हो गईं गलतियां, इस बार 'सोनार किला' में जोड़ दी 'चुलबुल पांडे' की कहानी

By: पवन राणा
| Published: 19 Jan 2021, 12:10 AM IST
Goa Film Festival में आम हो गईं गलतियां, इस बार 'सोनार किला' में जोड़ दी 'चुलबुल पांडे' की कहानी
Goa Film Festival

० सत्यजीत राय की क्लासिक फिल्में भी दिखाई जा रही हैं समारोह में
० अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा को बताया 'सोनार किला' का निर्माता
० फिर अपनानी पड़ी 'हमसे भूल हो गई, हमका माफी दई दो' की मुद्रा

-दिनेश ठाकुर

सत्यजीत राय ने रहस्य कथा 'सोनार किला' 1971 में लिखी और 1974 में इस पर फिल्म बनाई। तब सलमान खान आठ-नौ साल के रहे होंगे। राय की इस फिल्म से उनका दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। लेकिन भारतीय फिल्म समारोह निदेशालय ने कायम कर दिया। गोवा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ( Goa Film Festival ) में सत्यजीत राय की क्लासिक फिल्में भी दिखाई जा रही हैं। समारोह की अधिकृत वेबसाइट पर 'सोनार किला' ( Sonar Kella movie ) का जो ब्योरा दिया गया, मुलाहिजा फरमाइए- 'निर्माता-अभिनेता अरबाज खान की फिल्म। 'सोनार किला' हंसमुख, निडर, लेकिन भ्रष्ट पुलिसकर्मी चुलबुल पांडे के बारे में है। अपने सौतेले भाई मक्खी और पिता से उसकी नहीं पटती। इसी नाम के उपन्यास पर आधारित 'सोनार किला' में लीजेंड बांग्ला अभिनेता सौमित्र चटर्जी अहम किरदार में हैं।' आगे अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा को 'सोनार किला' का निर्माता बताया गया। जाहिर है, ब्योरा देने वालों ने 'सोनार किला' के बदले सलमान खान की 'दबंग' ( Dabangg Movie ) का कथासार पेश कर दिया। जब फिल्म प्रेमियों ने गलती की तरफ ध्यान दिलाया, तो फिल्म समारोह के आयोजकों ने 'असुविधा पर गहरा खेद' जताते हुए माफी मांग ली।

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थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब...
इस गलती को लेकर सोशल मीडिया पर समारोह के आयोजकों का खूब मजाक उड़ा। बांग्ला फिल्मकार श्रीजीत मुखर्जी ने ट्वीट किया- 'थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, फेलू मित्र से लगता है।' इस बार सत्यजीत राय को श्रद्धांजलि के तौर पर समारोह में उनकी 'सोनार किला' के अलावा 'पाथेर पंचाली' (1955), 'चारूलता' (1964), 'शतरंज के खिलाड़ी' (1977) और 'घरे बाइरे' (1984) दिखाई जा रही हैं।


सत्यजीत राय के साथ दूसरी बार गलती
अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह जैसे बड़े आयोजन में, जहां सैकड़ों फिल्में शामिल हों, इस तरह की गलती एकाध बार हो, तो बात समझ आती है। लेकिन बार-बार गलती होना आयोजकों की लापरवाही दर्शाता है। गंभीर बात यह है कि गलती सत्यजीत राय जैसे फिल्मकार के साथ होती है, जिनकी फिल्में दुनियाभर में पहचानी जाती हैं। समारोह के आयोजक सत्यजीत राय तक को नहीं पहचानते। दो साल पहले गोवा के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में राय की 'गणशत्रु' दिखाई गई थी। इसके ब्योरे में राय का परिचय देते हुए उनके बदले 'परिचय' बनाने वाले गुलजार की फोटो लगा दी गई। तब इस फिल्म के अभिनेता सौमित्र चटर्जी ने अफसोस जताया था कि समारोह के आयोजक न सत्यजीत राय को पहचानते हैं, न गुलजार को।

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दिवंगत राजकुमार की जगह किसी और की तस्वीर
जिक्र किसी का, तस्वीर किसी और की वाली गड़बड़ी 2006 के गोवा समारोह में भी हुई थी। उस साल अधिकृत ब्रोशर में दिवंगत कन्नड़ फिल्मकार राजकुमार के बदले कन्नड़ के ही जीवित फिल्मकार गिरीश कसरवल्ली की तस्वीर लगा दी गई। समारोह के संचालन का जिम्मा संभाल रही एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा को इस गलती के लिए माफी मांगनी पड़ी थी। गोवा समारोह को कान समारोह की टक्कर के आयोजन में बदलने को कोशिशों में जुटे फिल्म समारोह निदेशालय को ऐसी गलतियों के सिलसिले पर पूर्ण विराम लगाना चाहिए। बार-बार 'हमसे भूल हो गई, हमका माफी दई दो' की मुद्रा अपनाने से समारोह की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़ता है।