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झाबुआ में तैयार हुई सबसे बड़ी सेंट्रल लाइब्रेरी, एक छत के नीचे 5 हजार से ज्यादा किताबें

यूपीएससी-एमपीपीएससी से लेकर स्कूल-कॉलेज तक की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधा

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कलेक्टर नेहा मीना की पहल, डीएमएफ व सीएसआर फंड से 2900 वर्गफीट में साकार हुआ सपना

कलेक्टर नेहा मीना की पहल, डीएमएफ व सीएसआर फंड से 2900 वर्गफीट में साकार हुआ सपना

झाबुआ. पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल में शिक्षा की नई इबारत लिखी जा रही है। जिला मुख्यालय पर भव्य ‘सेंट्रल लाइब्रेरी’ बनकर तैयार है, जो क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए सफलता का नया द्वार खोलेगी। कलेक्टर नेहा मीना की पहल पर जनजातीय कार्य विभाग के पुराने भवन का रिनोवेशन कर इसे आधुनिक ज्ञान केंद्र में परिवर्तित किया गया है। 2900 वर्गफीट में फैली इस लाइब्रेरी का निर्माण डीएमएफ और सीएसआर फंड से किया गया है। हाल ही में निरीक्षण पर पहुंचे संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े भी इसकी व्यवस्थाएं देखकर प्रभावित हुए। किताबों का संकलन पूरा होते ही इसका विधिवत संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा।

प्रतियोगी छात्रों के लिए बनेगा लॉन्च पैड

जिले में लंबे समय से ऐसी जगह की कमी महसूस की जा रही थी, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को शांत वातावरण और स्तरीय अध्ययन सामग्री मिल सके। उत्कृष्ट विद्यालय मैदान के पास स्थित पुराने भवन को नए स्वरूप में ढालकर यह कमी पूरी कर दी गई है। यह लाइब्रेरी केवल भवन नहीं, बल्कि झाबुआ के युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला ‘लॉन्च पैड’ साबित होगी। यहां एक ही छत के नीचे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विषयों, विज्ञान, इतिहास और समसामयिक घटनाओं से जुड़ी मानक पुस्तकें उपलब्ध होंगी।

युवाओं को होंगे बहुआयामी लाभ

  1. संसाधनों की सुलभता: आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को महंगी किताबें नि:शुल्क या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होंगी।
  2. ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा: दिल्ली-इंदौर जैसे बड़े शहरों की कोचिंग अब झाबुआ में ही सुलभ होगी।
  3. एकाग्रता का माहौल: घर की भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण में पढ़ाई संभव होगी।
  4. दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था: ग्राउंड फ्लोर पर अध्ययन की सुविधा सुनिश्चित की गई है।

आदिवासी अंचल में शिक्षा का नया अध्याय

झाबुआ की यह सेंट्रल लाइब्रेरी शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। यह पहल न केवल संसाधनों की कमी को दूर करेगी, बल्कि युवाओं में प्रतिस्पर्धा की नई ऊर्जा भी भरेगी। ज्ञान के इस नए मंदिर से अब आदिवासी अंचल के सपनों को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट व्यू…मोबाइल युग में लाइब्रेरी की प्रासंगिकता

डॉ. केके त्रिवेदी, सेवानिवृत्त प्राचार्य
सोशल मीडिया और रील्स के दौर में युवाओं का ध्यान भटकना आम हो गया है। ऐसे समय में यह लाइब्रेरी ‘डिजिटल डिटॉक्स सेंटर’ की तरह कार्य करेगी। फिजिकल किताबों के साथ लाइब्रेरी में बैठकर पढऩा ‘डीप वर्क’ को संभव बनाता है, जो यूपीएससी जैसी परीक्षाओं के लिए अनिवार्य है। मोबाइल नोटिफिकेशन से दूर रहकर छात्र अधिक एकाग्रता से अध्ययन कर सकते हैं। मानक पुस्तकों से पढ़ाई करने पर जानकारी की प्रमाणिकता बनी रहती है, जबकि इंटरनेट पर कई बार अधूरी या भ्रामक जानकारी मिल सकती है।

फैक्ट फाइल…एक नजर में लाइब्रेरी की खासियत

  • क्षेत्रफल: 2900 वर्गफीट का विशाल परिसर
  • क्षमता: एक साथ 70 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था
  • संग्रह: यूपीएससी, एमपीपीएससी, स्कूल व कॉलेज परीक्षाओं सहित 5000+ पुस्तकें
  • डिजिटल सुविधा: ऑनलाइन क्लास के लिए विशेष हॉल व कंप्यूटर सेक्शन
  • सुरक्षा: सीसीटीवी कैमरों से लैस परिसर, आगंतुकों के लिए वेटिंग रूम

हम बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ किताबें जुटा रहे

हम बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ किताबें जुटा रहे हैं। हमारा उद्देश्य युवाओं को ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां वे ज्ञान अर्जित कर अपना करियर बना सकें। जल्द ही किताबों के लिए डोनेशन ड्राइव भी चलाई जाएगी। - नेहा मीना, कलेक्टर, झाबुआ