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नैनवां नगरपालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, कानूनगो व पटवारी गिरफ्तार

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा की टीम ने सरकारी जमीन का फर्जी तरीके से नक्क्षा पास करने के 9 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर शुक्रवार को एसीबी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए।
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बूंदी

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pankaj joshi

Aug 07, 2021

नैनवां नगरपालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, कानूनगो व पटवारी गिरफ्तार

नैनवां नगरपालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, कानूनगो व पटवारी गिरफ्तार

नैनवां नगरपालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, कानूनगो व पटवारी गिरफ्तार
सरकारी जमीन का फर्जी तरीके से नक्शा पास करने का मामला
15 दिन न्यायिक अभिरक्षा में भेजा
बूंदी. कोटा. नैनवां. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा की टीम ने सरकारी जमीन का फर्जी तरीके से नक्क्षा पास करने के 9 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर शुक्रवार को एसीबी कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 15 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ठाकुर चन्द्रशील कुमार ने बताया कि प्रकरण में एसीबी टीम ने बूंदी जिले के नैनवां तहसील के तत्कालीन पटवारी महावीर प्रसाद शर्मा, नैनवां नगर पालिका के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक व कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी (सेवानिवृत्त) भंवरलाल चौधरी व कानूनगो छोटूलाल वर्मा को जांच के बाद गिरफ्तार कर किया है। तीनों आरोपियों को शुक्रवार को एसीबी न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 15 दिन के न्यायायिक अभिरक्षा में भेज दिया। प्रकरण में फरार अन्य 4 आरोपियों की तलाश एसीबी कर रही है।
गौरतलब है कि नागौर जिले के मेड़ता सिटी निवासी सत्यनारायण कुमावत ने नैनवां में सिवायचक भूमि पर अतिक्रमण किया था। उस पर भूखण्ड काटकर 8 जून 08 से बेचान शुरू कर दिया। अतिक्रमण की जमीन पर शकुन्तला शर्मा व संतोष शर्मा की खातेदारी भूमि थी। सत्यनारायण ने दोनों की भूमि का सौदा किया और 10 लाख रुपए लेकर जमीन का बेचान इकरारनामा 11 जून 08 को मनमोहन बिन्दल के नाम करवाया। इसके बाद सत्यनारायण ने सौदे वाली जमीन की 90बी की कार्रवाई के लिए आवेदन किया। उसने स्वयं आवेदन लिखा तथा आवेदन पत्र पर संतोष व शकुन्तला के फर्जी हस्ताक्षर करवाए। खातेदारी भूमि के साथ स्वयं द्वारा अतिक्रमण की सिवायचक भूमि को सम्मिलित कर नक्शे तैयार कर लिए और तत्कालीन पटवारी महावीर शर्मा व तहसीलदार गणेशराम जिगोनिया से मिलीभगत कर 90बी की कार्रवाई 15 अगस्त 09 को करवाई। भंवरलाल चौधरी व वरिष्ठ लिपिक शरीफ मोहम्मद ने विनायक नगर के नम्बरों का खसरा सीमांकन कनिष्ठ अभियंता से नहीं करवाकर केवल पटवारी महावीर शर्मा से करवाकर सीधे वरिष्ठ नगर नियोजक कोटा को प्रेषित कर दिया। वरिष्ठ नगर नियोजक ने 15 जनवरी को नक्शा अनुमोदित कर नगरपालिका नैनवां को भेजा। सत्यनारायण कुमावत ने शरीफ मोहम्मद से मिलीभगत कर उसमें बदलाव किया तथा उस पर वरिष्ठ नगर नियोजक कुमावत के हस्ताक्षर व मुहर को स्कैन कर अंकित किया। विनायक नगर आवासीय योजना नैनवां के भाग 1,2, 3, 4, 5, 6 के पट्टे प्राप्त करने व पंजीयन करवाने में तत्कालीन लिपिक शरीफ मोहम्मद, अधिशासी अधिकारी कमलेश कुमार मीणा, शिवपाल सिंह व अध्यक्ष रुकमणी नागर की आरोपी सत्यनारायण कुमावत, बलदेवराम जाट से मिलीभगत रही। जांच में पता चला कि सत्यनारायण कुमावत व बलदेवराम ने जो नक्शे आवेदन के साथ दिए, वह अनुमोदित नक्शे से अलग थे। उनमें भूखण्डों का साइज नहीं था तथा उन नक्शों में सिवायचक भूमि खसरा संख्या 3540, 3547 व 3525 की भूमि को भी शामिल किया था।
पूरे मामले में 7 आरोपियों पर अपराध साबित हुआ था। इस पर बूंदी जिले के नैनवां तहसील के तत्कालीन पटवारी तथा सिसोला निवासी महावीर प्रसाद शर्मा, तत्कालीन कार्यकारी अधीशासी अधिकारी (सेवानिवृत्त) भंवरलाल चौधरी तथा नैनवां कानूनगो छोटूलाल वर्मा, तत्कालीन नैनवां नगर पालिका अध्यक्ष रुकमणी नागर, नागौर जिले के मेड़ता सिटी हाल नैनवां निवासी सत्यनारायण कुमावत, अजमेर निवासी तेजपाल सिंह चौधरी, मेड़तासिटी निवासी बलदेवराम जाट के विरुद्ध अपराध साबित होने पर कोर्ट में चालान पेश करने का निर्णय किया गया था। आरोपी लम्बे समय से फरार चल रहे थे। गुरुवार को इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फरार अन्य 4 आरोपियों की तलाश की जा रही है।
‘पत्रिका’ ने उठाया था विनायक नगर भूमि घोटाला
नैनवां के जजावर-बांसी तिराहे पर स्थित विनायक नगर भूमि घोटाले को राजस्थान पत्रिका ने साढ़े दस वर्ष पहले सिलसिलेवार खबर प्रकाशित कर बेबाकी से उठाया था। पत्रिका ने दस फरवरी 2011 को नियम-कायदे ताक पर, 11 फरवरी 2011 को सरकारी भूमि के सौदे आदि सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित की। सिलसिलेवार छपी खबरों के बाद समूचा प्रशासनिक अमला हरकत में आया और सरकारी भूमि को मुक्त कराया। पत्रिका ने एक मार्च 2011 को सरकारी भूमि मुक्त कराई व अपनी जमीन के बनाए पट्टे शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। बाद में मामला एसीबी के प्रदेश मुख्यालय पर पहुंचा और एसीबी ने जांच शुरू की। नौ वर्ष की जांच के बाद एसीबी ने मामले में नैनवां नगरपालिका की तत्कालीन पालिका अध्यक्ष रुकमणी नागर, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भंवरलाल चौधरी, नैनवां के कानूनगो छोटूलाल वर्मा, पटवारी महावीर शर्मा, तीन कॉलोनाइजर्स सत्यनारायण कुमावत, तेजपालसिंह चौधरी व बलदेवराम जाट को आरोपी माना। इनमें से तीन ओरोपी तत्कालीन अधिशासी अधिकारी भंवरलाल चौधरी, नैनवां के कानूनगो छोटूलाल वर्मा, पटवारी महावीर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।