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पेट्रोल-डीजल नहीं होने वाला है सस्ता, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई ये बड़ी वजह

पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Price) की बढ़ती कीमतों को लेकर सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बयान में कहा कि यह सही है कि लोग इससे चिंतित हैं और लोगों का चिंतित होना भी जायज है। लेकिन, अभी एक्साइज ड्यूटी में कोई भी कटौती नहीं की जा सकती है।

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Petrol Diesel Price Not Be Slashed Down, Union Finance Minister Nirmala Sitharaman Stated Reason

नई दिल्ली। देश में कोरोना संकट के बीच पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) की बढ़ती कीमतों और महंगाई से आम नागरिक परेशान है। कई राज्यों में पेट्रोल व डीजल की कीमत 100 रुपये पार हो चुकी है। ऐसे में विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर है और महंगाई पर लगाम लगाने के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने की मांग कर रही है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं होने वाले हैं।

दरअसल, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने एक बयान में कहा कि यह सही है कि लोग इससे चिंतित हैं और लोगों का चिंतित होना भी जायज है। लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार चर्चा करें। जब तक दोनों के बीच चर्चा नहीं होगी तब तक इसका समाधान संभव नहीं है। वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अभी एक्साइज ड्यूटी में कोई भी कटौती नहीं की जा सकती है।

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वित्त मंत्री ने कहा कि देश के उपर भारी कर्जा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की ओर से सरकारी खजाने से जारी किए गए तेल बॉडों के लिए आज भी ब्याज भुगतान किया जा रहा है। पिछले पांच सालो में मोदी सरकार ने ऑयल बॉन्ड पर सिर्फ ब्याज के तौर पर 70,195.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और हमें 2026 तक 37 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

वित्त मंत्री ने यूपीए सरकार को ठहराया जिम्मेदार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे बोलते हुए कहा कि ब्याज का भुगतान करने के वाबजूद अभी भी 1.30 लाख करोड़ से अधिक का मूलधन चुकाना बाकी है। यदि हमारे पास तेल बॉंड का बोझ नहीं होता तो हम ईंधन के दामों में कटौती करने की स्थिति में होते और आज आम लोगों को इसका लाभ मिलता।

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए वित्त मंत्री ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने 1.44 लाख करोड़ रुपये कीमत के ऑयल बॉंड जारी करके तेल की कीमतें घटाई थीं। लेकिन हम इस तरह की चालबाजी नहीं करेंगे। क्योंकि इसी वजह से मौजूदा सरकार पर कर्जे का बोझ काफी बढ़ गया है और हम पेट्रोल-डीजल के दाम चाहकर भी कम नहीं कर पा रहे हैं।

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