कार अपनी पूरी लाइफ का सिर्फ 5 फीसदी टाइम ही सड़क पर गुजारती है। बाकी का वक्त यानि 95 फीसदी टाइम गाड़ियां पार्किंग में खड़ी रहती हैं।
नई दिल्ली: भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बड़ा सेक्टर है। सड़क पर कारों की बढ़ती संख्या देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने लोग गाड़ी खरीदते हैं। खैर भले ही हमारे यहां लोग गाड़ी खरीद लेते हैं कि लेकिन एक रिसर्च के मुताबिक हमारे देश में गाड़ी यानि कार अपनी पूरी लाइफ का सिर्फ 5 फीसदी टाइम ही सड़क पर गुजारती है। बाकी का वक्त यानि 95 फीसदी टाइम गाड़ियां पार्किंग में खड़ी रहती हैं।
रिसर्च के मुताबिक भारत की एक औसत कार 8,360 घंटे खड़ी रहती है, वहीं सिर्फ 400 घंटे ही सड़क पर चलती है। आपको बता दें कि इस रिसर्च को करने में पूरे एक साल का वक्त लगा है।
471 फुटबॉल ग्राउंड्स के बराबर चाहिए पार्किंग स्पेस-
रिसर्च में यह भी पता चला है कि सिर्फ दिल्ली में 471 फुटबॉल मैदान के बराबर पार्किंग के लिए स्पेस चाहिए । इसके अलावा शहरी इलाकों में कार को खड़ा रखने के लिए पार्किंग की जगह की बहुत ज्यादा मांग होती है। वहीं चेन्नई में 100, चंडीगढ़ में 58 और गुड़गांव में 179 फुटबॉल मैदान के बराबर है।
शोध में ये भी सामने आया कि 85 प्रतिशत पार्किंग की जगह सिर्फ कार और बाइक्स खड़ी करने के लिए होती है । जबकि बसों की बात करें तो 20 गुना ज्यादा याति ले जाने के बावजूद बसों को सिर्फ 4-5 फीसदी पार्किंग स्पेस की जरूरत होती है।
पार्किंग फ्री होना है बड़ी समस्या-
पार्किंग स्पेस कम होने के पीछे और इतनी संख्या में गाड़ियों के पीछे बड़ी वजह हमारे देश में पार्किंग फ्री होना है। दुनियाभर में पार्किंग के लिए लोगों को अलग से रकम चुकानी पड़ती है। पार्किंग शुल्क को बढ़ा दिया जाए तो लोगों द्वारा कारों को खरीदना कम हो सकता है। पार्किंग शुल्क कम होने से टैक्स में कमी तो आती ही है, साथ ही स्कूल, स्वास्थ्य सेवा केंद्र और वृद्धा आश्रम जैसी जगहों के लिए जमीन नहीं मिलती है।