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सैलानियों के मन में देश की संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गया महोत्सव

- 47 वें खजुराहो नृत्य महोत्सव का समापन- रासलीला, रामायण के नवरस और शिव भक्ति ने किया आनंदित

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छतरपुर. 47वें खजुराहो नृत्य महोत्सव का शुक्रवार को भरतनाट्यम समूह नृत्य के साथ समापन हो गया। जवाहरलाल नेहरू मणिपुर डांस अकादमी के कलाकारों ने रासलीला, डोल नृत्य और ढोल नृत्य के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया। इसके बाद आर्या नंदे ने ओडिसी नृत्य के जरिए रामायण में समाहित नवरसों का वर्णन किया। आखिरी प्रस्तुति में पूर्णिमा अशोक ने अपने साथियों के साथ भरतनाट्यम समूह नृत्य की प्रस्तुति देकर नटराज भगवान शिव की भक्ति व कृपा पाने का मार्ग बताया। मणिपुर डांस अकादमी के कलाकारों बसंत रास के जरिए वृन्दावन की रास लीला का वर्णन किया। नृत्य के जरिए निरीना यामबेम ने कृष्ण और जी चंद्रन डेविल ने राधा के रूप में संवाद को कंदरिया मंदिर में जीवंत कर दिया।

खंभों में घंटी की आकृति से पड़ा घंटाई मंदिर नाम
खजुराहो नृत्य महोत्सव में शामिल होने आए पर्यटक जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ को समर्पित घंटाई मंदिर को देख चकित हुए। मंदिर के बचे अवशेषों में खंभे पर घंटी (बेल) की आकृति अंकित होने के कारण मंदिर का नाम घंटाई मंदिर पड़ गया। घंटाई मंदिर का निर्माण चंदेल राजा धंगंदेव के शासनकाल के दौरान 10वीं सदी में किया गया था। यह मंदिर मूल रूप से पाश्र्वनाथ मंदिर के समान डिजाइन का था, लेकिन आयामों में लगभग दो गुना बड़ा था।

प्रमुख सचिव, संस्कृति एवं पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि संस्कृति विभाग उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया गया था। देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पर्यटक खजुराहो नृत्य समारोह में सांस्कृतिक गतिविधियों के आनंद की अनुभूति के साथ-साथ साहसिक गतिविधियों से भी रोमांचित हुए। किसी एक स्थान पर सांस्कृतिक, साहसिक और कला कार्यशाला गतिविधियों के अद्भुत संगम का आयोजन अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि हैं। अगले वर्ष इस समारोह को और भी भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।