
district hospital
छतरपुर। पिछले पांच दिनों से अस्पताल में मरीजों की संख्या कम हो गई थी। लेकिन शुक्रवार और शनिवार को मरीजों की संख्या में इजाफा होने से अस्पताल की व्यवस्था गड़बड़ा गई। मरीजों को पंजीयन से लेकर, ओपीडी में इलाज और दवा की लाइनों में ज्यादा समय देना पड़ रहा है। रुक-रुक हो रही बारिश से मच्छरजनित और वायरल बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में सर्दी-खांसी, वायरल बुखार, मलेरिया, पेचिस, दस्त, बदहजमी, फोड़े-फुंसी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। पिछले पांच दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या औसत से कम थी। लेकिन शुक्रवार और शनिवार को मरीजों की संख्या में 30 फीसदी का इजाफा हो गया।
सुबह 9 बजे से लग गई लाइनें
बड़ी संख्या में मरीज सुबह 9 बजे से जिला अस्पताल पहुंचे गए। हर चैंबर में दो डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन ज्यादातर में एक ही डॉक्टर उपलब्ध रहे। उपस्थित स्टाफ डॉक्टर राउंड पर होने की बात कहकर इंतजार करने को कहते रहे। ज्यादातर डॉक्टर देर से चैंबर में बैठे, तब मरीजों को इलाज मिलना शुरु हुआ। ऐसे में उन मरीजों की समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिन्हें डॉक्टरों ने जांच लिख दी।
दवा के लिए भी परेशानी
डॉक्टर को दिखाने की परेशानी के साथ ही दवाओं के लिए भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मशक्कत के बाद डॉक्टर से दवा लिखाने पर दवा काउंटर पर भी लंबी लाइनों में लगना पड़ा। जब नंबर आया तो पता चला कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं में से कुछ दवाएं अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं थी। अस्पताल से दवा लेने के बाद जो दवाएं वहां नहीं मिली उन्हें अस्पताल के बाहर से खरीदना पड़ा।
ये कहना है मरीजों का
कुत्ता ने काट लिया है, रैबीज टीका लगवाने मां केस के साथ जिला अस्पताल के टीकाक रण केन्द्र आए हैं, ताला लगा हुआ है, इंतजार में एक घंटे से बैठे हैं।
पवन कोरी, मरीज
सियार ने घायल कर दिया है, इलाज के लिए जिला अस्पताल 11 बजे आ गए थे, टीकाकरण केन्द्र वाले कभी इस डॉक्टर तो कभी उस डॉक्टर के पास भेजते रहे। वहां से लौटे तो टीकाकरण केन्द्र ही बंद मिला।
रेखा सेन, निवासी तिलवां
अपने बच्चे को टीका लगवाने जिला अस्पताल आई, लेकिन टीकाकरण केन्द्र बंद मिला। कोई बताने वाला भी नहीं है, कि टीका लग पाएगा या नहीं।
ममता अहिरवार, निवासी बूढ़ा
चोट लगी है, डॉक्टर को दिखाया तो, उन्होंने एक्सरे कराने को कहा, अस्पताल में एक्सरे नहीं हुआ, बाहर से करवाकर आए, तब तक डॉक्टर ही चले गए।
दलुआ अहिरवार, निवासी गहरवार
महिला वार्ड में जमीन पर लेटी प्रसूता
महिला वार्ड में प्रसूताओं को लेटने के लिए पलंग तक उपलब्ध नहीं है। सेवड़ी निवासी गिरजा कुशवाहा ने बताया कि, उनकी देवरानी नीलम को डिलीवरी के लिए रात में 2 बजे लाए थे, सुबह डिलीवरी हुई, लेकिन पलंग नहीं मिलने से बच्चा समेत जमीन पर लेटना पड़ा। वहीं, लक्ष्मनपुरा निवासी रचना यादव ने बताया कि गुरुवार को डिलीवरी हुई थी, तभी से जमीन पर लेटे हैं। पलंग नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही बदबू से बहुत परेशानी है।
ओपीडी डॉक्टरों की कमी से हुई मुसीबत
ओपीडी मेें डॉक्टरों के चैंबर में सभी डॉक्टर नहीं बैठने से मरीजों को लाइन में एक-एक घंटे इंतजार करना पड़ा। सटई रोड निवासी संतोषी ने बताया कि बच्ची का ऑपरेशन हुआ था, डॉक्टर ने फॉलोअप के लिए बुलाया था, लेकिन डॉक्टर ही नहीं मिले। वायरल से पीडि़त भुवानी बाई ने बताया कि, महिला डॉक्टर नहीं बैठी, जिससे वे दिखा नहीं पाई। सलैया निवासी राकेश यादव ने बताया कि, बच्चे को दस्त लग रह हैं। बच्चों के डॉक्टरों में सिर्फ लखन तिवारी बैठे हैं, वहां भीड़ अधिक है, बड़ी परेशानी उठाकर डॉक्टर तक पहुंच पाए हैं। बजरंगनगर निवासी कैलाश पटेल बुखार का इलाज कराने आए थे, लेकिन जनरल मेडिसीन के सभी डॉक्टर मौजूद नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ा, भीड़ इतनी है, कि बिना दिखाए ही वापस जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रथम श्रेणी चिकित्सक ३५ 21 14
द्तिीय श्रेणी चिकित्सक 26 28 2 अतिरिक्त
फैक्ट फाइल
तारीख ओपीडी में मरीज
17 अगस्त 1247
16 अगस्त 1323
15 अगस्त 385
14 अगस्त 1040
13 अगस्त 1195
12 अगस्त 610
11 अगस्त 478
10 अगस्त 1418
सुधार के कर रहे प्रयास
छुट्टी के बाद अचानक ज्यादा मरीज आने से व्यवस्था गड़बड़ा गई थी, सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। टीकाकरण केन्द्र पर मरीजों को असुविधा न हो इसके लिए स्टाफ को निर्देश दिए जाएंगे। व्यवस्था में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
विजय पथौरिया, सीएमएचओ
Published on:
18 Aug 2019 06:00 am

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