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छतरपुर

तालाबों को बचाने के मुहिम शुरु, शहर के सात तालाबों का हुआ सीमांकन

रोवर मशीन से तालाबों का किया गया सीमांकन, तालाब की जमीन पर अतिक्रमण चिंहित

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छतरपुर. जिले के तालाबों को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष मुहिम शुरु कर दी है। अभियान के तहत छतरपुर शहर के प्रमुख सात तालाबों का रोवर मशीन से सीमांकन किया गया। सीमांकन के जरिए शहर के प्राचीन प्रताप सागर तालाब,किशोर सागर,ग्वाल मगरा,संकट मोचन,रानी तलैया, विंध्यवासिनी तलैया,सतरी तलैया तालाब की जमीन पर अतिक्रमण को नए सिरे से चिंहित किया गया है। सीमांकन में ये भी पाया गया कि पूर्व में हटाए गए अतिक्रमण फिर से हो गए हैं। प्रशासन जल्द ही तालाब की जमीन से अतिक्रमण हटाएगा। प्रशासन ने जिले के 607 तालाबों के अतिक्रमण को हटाने के लिए विशेष मुहिम शुर की है।

शहर के चार तालाब पूरी तरह हो गए खत्म
रियासत काल से लेकर दो दशक पहले तक कभी छतरपुर को तालाबों का शहर कहा जाता था, लेकिन शहर के 11 में से 4 तालाब तो पूरी तरह खत्म हो गए हैं। बचे 7 तालाब भी भू-माफियाओं के निशाने पर है। अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे शहर के तालाबों की दयनीय स्थिति और रसूखदार भू-माफियाओं की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड में 11 तालाब दर्ज हैं लेकिन 11 में से 4 तालाब न केवल पूरी तरह खत्म हो चुके हैं बल्कि उन पर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गईं हैं। खसरा नंबर 779 आज भी शासकीय रिकॉर्ड में बंधान दर्ज है जिसका रकवा 0.162 बन्दोबस्त के रिकार्ड में दर्ज है। खसरा नंबर 1285 भी बंदोबस्त के रिकॉर्ड में बंधिया के नाम से दर्ज है जिसका रकवा 0.141 पूराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। खसरा नंबर 1413 एवं 1625 पुराने राजस्व रिकॉर्ड में बांध के नाम से दर्ज है जिसका रकवा क्रमश: 0.417 एवं 0.320 बंदोबस्त के रिकार्ड में दर्ज है। इसी तरह खसरा नंबर 2815 बंधान के नाम से आज भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है जिसका रकवा 0.522 बंदोबस्त के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि शहर के यह चारों तालाब सिर्फ रिकॉर्ड में दर्ज रह गए हैं, आज हकीकत यह है कि इन चारों तालाबों की जमीन पर बड़ी बड़ी इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। यह तालाब आज पूरी तरह विलुप्त हो चुके हैं।

बाकी तालाबो के अस्त्तिव पर खतरा
ग्वालमंगरा तालाब के मूल रकवे पर अतिक्रमण कर लगातार कब्जा हो रहा है। हर वर्ष तालाब न सिर्फ सिकुड़ रहा है बल्कि तालाब में गंदे पानी के नए स्त्रोत भी छोड़े जा रहे हैं। ग्वाल मंगरा तालाब में प्लास्टिक, पॉलीथिन एवं अन्य कचरा इतनी मात्रा में फेंका जा रहा है कि घाटों के समीप पानी ही नजर नहीं आता। पूरे तालाब में जलकुंभी के कारण हरी चादर दिखाई देती है। यही हालात संकट मोचन तालाब के हैं जहां गंदी नालियां तालाब में छोड़ी गई हैं।महोबा रोड स्थित विध्यवासिनी तलैया में जानराय पहाड़ी सहित टौरिया मोहल्ले का गंदा पानी नालियों से पहुंचता है। इस कारण यहां का पानी हमेशा गंदा बना रहने के साथ ही दुर्गंध देता रहता है। जवाहर रोड स्थित गायत्री मंदिर तलैया में दोनों बस स्टैंड सहित नौगांव रोड, फव्वारा चौक और दूध नाथ कॉलोनी के घरों का गंदा पानी आता है। पूरी तलैया का पानी गंध मारता है। इस तलैया में जल कुंभी का घेरा होने से घांस का मैदान जैसा लगने लगा है।

तालाब किनारे तैयार होंगे फ्रूट पार्क
जिले में मौजूद 607 तालाबों में से 561 तालाब ऐसे हैं जिनका पूर्व में सीमांकन हो चुका है। सीमांकन के दौरान पाया गया कि इन तालाबों पर कोई कब्जा नहीं है। जबकि जिले के कुल तालाबों के 85.349 हेक्टेयर क्षेत्र पर कब्जे की शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। अब तक प्रशासन ने 19 अतिक्रमणकारियों पर कार्यवाही भी की है। हालांकि यह कार्यवहियां पुरानी हैं। अब नए सिरे से कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि छतरपुर तहसील क्षेत्र में 97 तालाब मौजूद हैं, जिनमें 39 ग्रामीण क्षेत्र में एवं 58 तालाब नगरीय क्षेत्र में मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद तालाबों का कुल रकवा 317.87 हेक्टेयर है जबकि शहरी क्षेत्र में मौजूद तालाबों का कुल रकवा 196.082 हेक्टेयर है। बताया गया है जिले में कुल 607 तालाबों का रकवा 2692.118 हेक्टेयर है। जिलेभर के तालाबों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही तालाब किनारे पौधारोपण करने की भी रणनीति बनाई गई है। सबसे पहले अतिक्रमण चिंहित करके हटाया जाएगा। इसके बाद तालाब के कैचमेंच एरिया से चैनल बनाकर तालाबों में पानी आने के नैसर्गिक रास्ते बहाल किए जाएंगे। इसके बाद तालाब के चारो ओर फलदार व छायादार पौधे रोपकर फ्रूट पार्क तैयार किए जाएंगे।

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