अवैध उत्खनन से तालाबों का पानी जहरीला होने की याचिका पर हुई सुनवाई
छतरपुर। जिले की सीमा से लगे उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के पहाड़ों पर हुए उत्खनन की जांच होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने चार सदस्यीय संयुक्त समिति को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के नाहरी, खलारी गांवों की पहाडिय़ों में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन में अवैध खनन, क्रशिंग और ब्लास्टिंग का आरोप लगाने वाली याचिका की तथ्यात्मक स्थिति को सत्यापित करने का निर्देश दिया है।
शिकायत के अनुसार अवैध खनन व ब्लास्टिंग से आसपास के क्षेत्र में वायु व जल प्रदूषण हो रहा है जिससे आसपास के ग्रामीणों व उनके मवेशियों की जान को खतरा है। याचिका में यह भी दलील दी गई है कि विस्फोट से ग्रामीणों के घर नष्ट हो गए हैं और तालाब का पानी जहरीला हो गया है जिससे कई मवेशियों की मौत हो रही है।
न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, निदेशक खनन और भूवैज्ञानिक विभाग, जिला वन अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट की एक संयुक्त समिति के माध्यम से मामले में तथ्यात्मक स्थिति का पता लगानने के आदेश दिए हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि है कि राज्य पीसीबी समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी होगी। संयुक्त समिति को चार सप्ताह के भीतर बैठक करने और साइट का दौरा करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने पैनल से तीन महीने के भीतर तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है। मामले में आगे की सुनवाई 13 जुलाई को नीयत की गई है।
गौरतलब है कि छतरपुर जिले से लगे बांदा जिले में ऊंचे ऊंचे पहाड़ा उत्खनन व अवैध उत्खनन से खत्म हो गए है। पहाड़ों की जगह गहरी गहरी खाइयां हो गई है। बेहताशा उत्खनन से स्थानीय पर्यावरण खतरे में पड़ गया है। इसी मुद्दे को एनजीटी में उठाया गया है।