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कृषि विभाग द्वारा जांच के नाम पर खानापूर्ति, इस कारण कालाबाजारी पर नहीं लग रहा अंकुश

जिले में 1304 दुकानों में 872 कीटनाशक की, अधिकांश बगैर लाइसेंस बेच रहीं खाद-बीज

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खाद

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छतरपुर. जिले में हर साल खाद-बीज और कीटनाशक की दुकानों पर कालाबाजारी के मामले सामने आते हैं। ठोस कार्रवाई न होने से खाद, बीज और कीटनाशक की दुकानों से कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 70 प्रतिशत दुकानें ऐसी संचालित हैं, जिनके पास सिर्फ कीटनाशक बेचने का लाइसेंस हैं, इसके बाद भी ये धड़ल्ले से खाद-बीज बेच रहे हैं।

कार्रवाई में ढिलाई
मुख्यालय पर कलेक्टर के निर्देशन में दो दुकानों पर हुई कार्रवाई से भी हुआ है, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में है। जांच टीम ने भी पुष्टि की थी कि उक्त दुकानों के पास बीज का लाइसेंस नहीं है, फिर भी घटिया बीज का विक्रय हुआ है। विभाग ने बगैर अनुमति घटिया बीज़ बेचने का मामला दबा दिया है। बस इसलिए यह घटिया खाद-बीज का धंधा फल-फूल रहा है। जिले में गड़बड़ी करने वाले दुकानदारों पर कृषि विभाग की अधिकांश कार्रवाई नोटिस जारी करने तक सीमित है, इसके बाद आगे की कार्रवाई वहीं रुक जाती है

ठंडे बस्ते में डले रहते है प्रतिवेदन
एसएडीओ एसपी कारपेंटर का कहना है कि बगैर लाइसेंस लाइसेंस के बिक्री पाए जाने का प्रतिवेदन बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाता है, कार्रवाई उन्हें करना चाहिए। आगे की कार्रवाई क्यों रुक जाती है, यह वरिष्ठ अधिकारी ही बताएंगे। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में गुप्ता बीज भंडार व गोरखामी बीज भंडार पर प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में बगैर लाइसेंस के मिले थे, जिनका प्रतिवेदन बनाया था। उक्त दुकानों के कीटनाशक के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं, बीज की कार्रवाई अभी भी लंबित है। एसएडीओ ने बताया कि इसी तरह अन्य दुकानों की अनियमिताओं के भी नोटिस भेजते हैं और दुकानदारों को समझाइश देकर नियमों का पालन करने के निर्देश देते हैं।

लाइसेंस के लिए यह है अनिवार्यता
खाद की बिक्री के लिए लाइसेंस उन्हीं को दिया जाता है जो बीएससी एग्रीकल्चर या बीएससी रसायन शास्त्र उत्तीर्ण हो । इसके अलावा विभाग द्वारा 6 माह के डिप्लोमा करने के बाद भी लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। विभाग ने पहले की अपेक्षा अब प्रक्रिया को भी सरल कर दिया है और ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदन किए जाते हैं, इससे अब नवीन लाइसेंस की संख्या में इजाफा भी देखा जा रहा है, लेकिन पुरानी दुकानों में अभी भी अनियमितता देखी जा रही है।

इनका कहना है
दुकानों की सतत जांच विभागीय प्रक्रिया के तहत होती है, इंस्पेक्टर दुकानों से नमूने भरते हैं, यदि गड़बड़ी मिलती है तो उन्हें नोटिस जारी कर व्यवस्था में सुधार करने का मौका दिया जाता है। प्रयास यही रहता है कि किसानों के हित में काम हो और व्यवस्था में सुधार हो ।
बीपी सूत्रकार, उपसंचालक कृषि

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