scriptGreen belt not made in liquor factory, yet environment NOC received | शराब फै क्ट्री में ग्रीन बेल्ट नहीं बनाया, फिर भी मिली पर्यावरण की एनओसी | Patrika News

शराब फै क्ट्री में ग्रीन बेल्ट नहीं बनाया, फिर भी मिली पर्यावरण की एनओसी

locationछतरपुरPublished: Jan 15, 2024 03:43:41 pm

Submitted by:

Dharmendra Singh

एनओसी मिलने के 9 साल बाद भी नियमों को नहीं हो रहा पालन

शराब फैक्ट्री
शराब फैक्ट्री
छतरपुर. नौगांव नगर में संचालित जैगपिन बेवरीज शराब फैक्ट्री में सरकार की गाइड लाइन और पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जा रही है। पर्यावरण नियमों के मुताबिक फैक्ट्री की 6.6 हेक्टेयर भूमि के 33 फीसदी हिस्से पर जहां ग्रीन बेल्ट विकसित होना था, वहां जमीन बंजर पड़ी हुई है। इतना ही नहीं फैक्ट्री से निकले जहरीले पानी को सीलप नदी में छोडक़र नदी को दूषित किया जा रहा है। नदी में जहरीला पानी पहुंचने से आसपास के कुओं का भी पानी विषैला हो रहा है। जहरीला पानी खेतों को बंजर बना रहा है।
9 साल बाद भी ग्रीन जोन पोषित नहीं हुआ
शराब फैक्ट्री के संचालक विपिन चंद्र अग्रवाल और जगदीश चंद्र अग्रवाल द्वारा देशी, बियर शराब निर्माण की अनुमति लेने के दौरान पर्यावरण विभाग को दिए आवेदन के अनुसार एवं एनओसी मिलने के दौरान फैक्ट्री की 6.6 हेक्टेयर भूमि के कुल रकबा में से 33 प्रतिशत भूमि पर ग्रीन जोन पोषित करना था। लेकिन फैक्ट्री संचालक ने अपनी मजबूत पकड़ के चलते ग्रीन जोन पोषित करने के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर पर्यावरण विभाग को गुमराह किया। एनओसी ले ली लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया।

फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला पानी जानवरों और इंसानों को घातक
डिस्लरी का विषैला पानी नदी में जाने से आसपास के कुओं का पानी जहरीला हो रहा। यह जहरीला पानी मवेशियों एवं इंसानों के लिए घातक है। आसपास के लोगों व समाजसेवियों ने कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
10 विभागों की जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
शराब फैक्ट्री से छोड़े जा रहे जहरीले पानी से आसपास के आधा दर्जन ग्रामीण अंचलों एवं नगरवासियों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम से शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इसे गंभीरता से लेते हुए तात्कालीन एसडीएम विनय द्विवेदी ने दो दिन बाद ही माध्यम से 10 विभागों को 2 दिवस के अंदर जबाव पेश करने का आदेश पारित किया था। लेकिन ये कवादय भी बाद में ठंडे बस्ते में चली गई।
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