
Chhatarpur
छतरपुर। जिले बिजावर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य ग्राम चपनेर में एक आदिवासी परिवार का बच्चा आंख में कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। गरीबी और तंगहाली के कारण आदिवासी परिवार अपने अपने छह साल के मासूम बच्चे का इलाज नहीं करवा पा रहा है। डॉक्टर ने आंख में कैंसर का ऑपरेशन बताया है। लेकिन आपरेशन के लिए गरीब परिवार के पास रुपए नहीं होने के कारण वह अंतहीन दर्द से तडफ़ रहा है। जिगर के टुकड़े को तडफ़ता देख विजय आदिवासी के माता-पिता असहाय होकर खून के घूट पीने मजबूर है।
बिजावर ब्लाक के किशनगढ़ थाना अंतर्गत ग्राम चपनेर निवासी नन्नेलाल आदिवासी का 6 वर्षीय बेटा विजय की आंख में कैंसर हो गया है। डॉक्टर ने उसे ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन गरीबी के कारण नन्नेलाल का परिवार विजय का इलाज नहीं करवा पा रहा है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार के द्वारा गांव-गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद को इलाज के आभाव में दर दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चपनेर गांव का छह वर्षीय मासूम विजय आदिवासी आंखों में गंभीर बीमारी से तड़प रहा है। माता पिता अपनी हैसियत के मुताबिक इलाज करा चुके है। लेकिन जब एक फूटी कौड़ी भी नहीं बची तो अब जिगर के टुकड़े को भगवान के भरोसे छोड़कर बैठ गए हैं।
पीडि़त विजय के पिता नन्नेलाल आदीवासी का कहना है। बच्चे पर लगभग तीन साल पहले किसी ने जादू-टोना कर दिया था। इस कारण उस समय वह आठ दिन तक उसने आंख नहीं खोली। जैसे-तैसे वह ठीक हुआ, लेकिन उसी समय से आंखों में उसे परेशानी होने लगी। उसे अब दोनों आखों से दिखाई नहीं देता है। एक आंख से मांस निकल रहा है। उसे असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए दमोह और छतरपुर के अस्पतालों में दिखा चुके हंै। इलाज भी कराया पर मर्ज बढ़ता ही गया। डॉक्टर आपरेशन की बोलते है जिसमें बड़ा खर्च है, जो हमारी हैसियत के बाहर है। अगर हमारी सरकार मदद करें तो हमारा बच्चा ठीक हो सकता है। लेकिन गरीबों की कोई नहीं सुनता जिस से अभी भगवान के भरोसे बैठ गए हैं।
Published on:
14 Nov 2018 03:52 pm

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