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सीढिय़ों से दूसरी से चौथी मंजिल तक जा रहे मरीज, हार्ट और बीपी के मरीजों की फूल रही सांसें

5 में से तीन लिफ्ट खराब, भीड़ के चलते लिफ्ट से ऊपर जाने वालों को आधा घंटा तक करना पड़ रहा इंतजारबहुमंजिला जिला अस्पताल में अक्सर खराब रहती हैं लिफ्ट, मरम्मत के लिए बजट न होने से समस्या बढ़ी

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बच्चे को गोद व हाथ में सामान लेकर सीढियां उतरता मरीज का परिजन

बच्चे को गोद व हाथ में सामान लेकर सीढियां उतरता मरीज का परिजन

छतरपुर. पांच मंजिला जिला अस्पताल में मरीजों व परिजनों की सुविधा के पांच लिफ्ट लगाई गई हैं। लेकिन उनमें से तीन लिफ्ट खराब हैं। एक लिफ्ट डाक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के लिए आरक्षित है। शेष बची एक लिफ्ट में अधिक भीड़ होने से मरीज परेशान रहते हैं। ऐसे में मरीज व परिजनों को दूसरी, तीसरी, चौथी मंजिल तक सीढिय़ों से जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी हार्ट व बीपी के मरीजों को हो रही है।उनकी सांसें तक फूल जाती हैं।

ऐसे परेशान हो रहे लोग
रमेश अहिरवार ने बताया कि पत्नी को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। डाॅक्टर ने कुछ जांचें लिखी जिसे लैब से कराके पत्नी को ऊपरी मंजिल तक ले जाने के लिए लिफ्ट के पास करीब आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। चालू दो लिफ्ट में लोगों की भीड़ ज्यादा रहती है। हीराबाई ने बताया कि उसके बेटे का दुर्घटना में पैर टूट गया। उसे चौथी मंजिल पर वार्ड में भर्ती कराया है वहां से एक्स-रे कराने नीचे लेकर आने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्ट्रेचर से किसी तरह बिना लिफ्ट के नीचे लेकर आए फिर परेशानी झेलकर ऊपर वार्ड में ले जा पाए हैं। साधना साहू ने भी बीमार बच्चे को ऊपरी मंजिल तक सीढिय़ां चढक़र ले जाने में आई परेशानी की दास्तान सुनाई।

आए दिन कोई न कोई रहती है खराब
जिला अस्पताल को नए भवन में वर्ष 2019 में शिफ्ट किया गया था। पांच मंजिला भवन में सारी सुविधाएं एक जगह देने के मकसद से जिला अस्पताल को बहुमंजिला बनाया गया। ऊपर की मंजिलों में मरीजों, परिजनों व डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को जाने में परेशानी न हो, इसके लिए पांच लिफ्ट लगाई गई। जिसमें से एक लिफ्ट डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए आरक्षित कर दी गई। बाकी चार लिफ्ट मरीजों, परिजनों की सुविधा के लिए लगाई गई। लेकिन शुरुआत के कुछ महीने छोडक़र पांचों लिफ्ट एक साथ नहीं चली।

रिपेयरिंग में लापरवाही सबसे बड़ी वजह
औसत एक हजार मरीज रोजाना की ओपीडी और तीन सौ की आइपीडी वाले जिला अस्पताल में मरीजों व परिजनों की आवाजाही हमेशा बनी रहती है। ऐसे में लिफ्ट का इस्तेमाल भी खूब होता है। लेकिन इसकी मरम्मत के काम में लापरवाही होती है। मरम्मत के अभाव में ही लिफ्ट खराब होती है। खराब होने के बाद सुधार कार्य के लिए इंजीनियर को बाहर से बुलाया जाता है। इंजीनियर कभी 10 तो कभी 15 दिन बाद आते हैं।

इनका कहना है
शासन से लिफ्ट के लिए मेंटनेंस व ऑपरेशन का बजट नहीं मिल पा रहा है। मैने कई बार पत्र लिखा है, हेल्थ कमिश्नर से भी मिला हूं, ताकि लिफ्ट मैन, मेंटनेंस का बजट मिले। फिलहाल एक रिजर्व लिफ्ट को छोडक़र सभी को रोगी कल्याण के बजट से शुरु कराया गया है।
डॉ. जीएल अहिरवार, सिविल सर्जन

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