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सेहत से खिलवाड़: वेस्टेज खाद्य तेल में खुशबू के लिए एसेंस और रंग के मिला रहे यलो बटर

छतरपुर शहर में लंबे समय से लोगों को शुद्ध सरसों के तेल की जगह मिलावटी और नकली तेल बेचा जा रहा है। कानपुर व महाराष्ट्र से वेस्टेज खाद्य तेल बड़े-बड़े टैंकरों में भरकर हर दूसरे दिन लाया जा रहा है पैकेजिंग ब्रांडेड कंपनियों के नाम से करवाकर बाजार में उतार दिया जाता है।

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मिलावटी तेल की पैकिंग का मटेरियल

छतरपुर. छतरपुर शहर में लंबे समय से लोगों को शुद्ध सरसों के तेल की जगह मिलावटी और नकली तेल बेचा जा रहा है। कानपुर व महाराष्ट्र से वेस्टेज खाद्य तेल बड़े-बड़े टैंकरों में भरकर हर दूसरे दिन लाया जा रहा है पैकेजिंग ब्रांडेड कंपनियों के नाम से करवाकर बाजार में उतार दिया जाता है। इस तेल के सेवन से लोगों को हार्ट, लिवर से संबंधित बीमारियों हो रही है। सरानी दरवाजा के बाहर आधा दर्जन से ज्यादा कारोवारी मुनाफाखोरी के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

बाजार में उतार रहे मिलावटी तेल


मिलावटी सरसों के तेल का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। मिलावटखोर हजारों लीटर मिलावटी तेल बाजार में बेच रहे हैं। बाहर से टैंकरों में आने वाले घटिया और सस्ते तेल में मस्टर्ड की सुगन्ध वाला एसेंस डाला जाता है। रंग निखारने के लिए उसमें हानिकारक व सस्ता यलो बाटर मिलाया जाता है। इसके बाद मिलावटी सरसों के तेल को सस्ते दाम में दुकानदारों तक पहुंचा दिया जाता है। 15 लीटर के सरसों के डिब्बे पर 500 से 800 रुपए तक का मुनाफा होने की वजह से दुकानदार भी इसकी बिक्री करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जबकि असली तेल की बिक्री में उन्हें 200 से 250 रुपए ही बचते हैं।

यहां चल रहा पूरा खेल


यदि आप 160 से 170 रुपए में मिलने वाला एक लीटर शुद्ध कच्ची घानी वाला ब्रांडेड सरसों तेल खरीद रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप अपने और परिवार की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, क्योंकि सस्ते के नाम पर तेल कारोबारी ब्रांडेड कंपनी की बोतल व टीन में रैपर लगाकर मिलावटी सरसों तेल बेच रहे हैं। सरानी दरवाज के आगे फिरंगी पछाड़ मंदिर के पास, बायपास मार्ग, मुक्तिधाम के पास सहित आधा दर्जन स्थानों पर तेल की नकली पैकेजिंग का यह खेल चल रहा है। मिलावटी तेल के इस धंधे में शामिल एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मिलावट का यह पूरा कारोबार कानपुर से शुरू होता है। कानपुर और इसके आस-पास के जिलों में भारी मात्रा में वेस्टेज खाद्य तेल निकलता है। वहां के चार-पांच बड़े कारोबारी अपने टैंकरों के जरिए तेल को छतरपुर के व्यापारियों तक पहुंचाते हैं। कारोबारी बाहर से टैंकर में पॉम आयल राइस ब्रान (धान की भूसी का तेल) व मलेशिया से देश में आने वाले वेस्टेज खाद्य तेल मंगाते हैं इन तेलों की खास बात यह है कि इनसे किसी प्रकार की सुगंध नहीं आती। मिलावटी तेल तैयार करने वाले इस खाद्य तेल को पीला रंग देने के लिए केमिकल एवं सुगंध के लिए इसमें 10 से 20 फीसदी सरसों तेल मिलाकर बोतल एवं जार में पैक कर देते हैं। इसके बाद इसमे ब्रांडेड कंपनियों का स्टीकर लगाकर बाजार में उतार दिया जाता है। प्रशासन की अनदेखी के चलते उपभोक्ता पूरा पैसा देने के बाद भी मिलावटी तेल खाने को मजबूर हैं।

ऐसे समझिए मिलावट का गणित


वर्र्तमान में सरसों के दाम बाजार 8000 से 8500 रुपए प्रति क्विटल है। मिल में पेराई के बाद सरसों तेल का लागत मूल्य प्रतिलीटर 130 से 140 रुपए आता है, जबकि बाजार में खाद्य तेल की नामी-गिरामी कंपनियों का रैपर लगा बोतल बंद तेल शहर में 150 से 160 रुपए लीटर उपलब्ध है। जिला प्रशासन की नाक के नीचे शहर में आधा दर्जन से अधिक रोल कारोबारी 40-50 रुपए में मिलने वाले पॉम आयल व वेस्ट खाद्य तेल को बोतल में बंद कर शुद्ध कच्ची घानी सरसों तेल के नाम से बेचकर हर दिन लाखों रुपए कमा रहे हैं।

हार्ट और लिवर को सबसे ज्यादा खतरा


मिलावटी सरसों के तेल के सेवन से सबसे ज्यादा नुकसान हार्ट को होता है। इसके बाद लिवर और अन्य अंगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फूड पॉइजनिंग आंतों का इनफेक्शन, पेट संबंधी गंभीर बीमारी हो सकती है। साथ ही यह सभी अंगों पर प्रभाव डालता है। लम्बे समय तक इसका प्रयोग करने से लिवर खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चें का विकास रुक जाता है।
डॉ. सुदीप जैन, मेडिकल विशेषज्ञ