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तालाब सिमटे तो शहर का जल स्तर धीरे-धीरे गिरकर 300 फीट पहुंचा

रियासतकालीन विरासत को निगल गया अतिक्रमण, पानी लाने वाले नालों पर भी कब्जा

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गायत्री तलैया जलकुंभी और नालों के पानी से तोड़ रही दम

गायत्री तलैया जलकुंभी और नालों के पानी से तोड़ रही दम

छतरपुर. रियासतकाल में छतरपुर शहर में पानी के इंतेजाम करने के लिए राजाओं ने तालाबों का निर्माण कराया। वर्ष 1707 में छतरपुर की स्थापना के समय आसपास कोई बड़ी नदी न होने के कारण समय-समय पर राजाओं ने तालाबों का निर्माण कराया। इन तालाबों को एक-दूसरे से जोड़कर इनका जलस्तर नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई। सभी तालाबों के जल की शहर के बाहर निकासी सिंघाड़ी नदी के माध्यम से होती थी। हमारे पुरखों ने जलसंरक्षण और जलप्रबंधन के लिए किए गए प्रयास अतिक्रमण और मनमानी के कारण ध्वस्त हो गए हैं। तालाबों में पानी लाने वाले नाले पर कब्जा होने से तालाब गंदे पोखरों में बदल चुके हैं। इसका दुष्प्रभाव यह है कि शहर का जलस्तर करीब 300 फीट तक नीचे जा चुका है।

प्रताप सागर में नहीं पहुंच रहा बारिश का पानी
महाराजा प्रताप सिंह ने महल के सामने प्रताप सागर तालाब का निर्माण कराया था। राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 2814 में प्रताप सागर तालाब का रकवा 14.204 हेक्टेयर (करीब 35 एकड़) दर्ज है। इस तालाब में बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम, महाराजा कॉलेज ग्राउंड से होते हुए बारिश का पानी पहुंचता था। दूसरा नाला महाराजा कॉलेज के गार्डन से होमगार्ड ऑफिस के बगल से होते हुए दूसरे नाले से बारिश का पानी पहुंचता था। इन दोनों नालों पर अतिक्रमण हो गया है। इस कारण अब इसमें बारिश का पानी नहीं पहुंच रहा है। तालाब के चारों ओर अतिक्रमण हो जाने से इसमें न तो बारिश का पानी पहुंच रहा है और न ही इस तालाब का पानी दूसरे तालाब में पहुंच पा रहा है इस कारण तालाब का अस्तित्व खतरे में है।

संकट मोचन तालाब में अतिक्रमण
संकट मोचन तालाब राजस्व रिकार्ड में राव सागर तालाब के नाम से दर्ज है। खसरा नंबर 2384 में दर्ज इस तालाब का रकवा 5.163 हेक्टेयर (करीब 13 एकड़) दर्ज है। यह तालाब तीन ओर से अतिक्रमण की चपेट में है। इस तालाब में बारिश का नहीं बल्कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी पहुंच रहा है। इस तालाब में कई घरों की सीवर लाइन थी डली हैं इस कारण तालाब कम पोखर ज्यादा है।

ग्वाल मगरा तालाब की स्थिति सबसे ज्यादा खराब
राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 2643 में 3.642 हेक्टेयर (करीब 10 एकड़) ग्वाल मगरा तालाब दर्ज है। इस तालाब में प्रताप सागर और रानी तलैया का पानी आता था। ग्वाल मगरा तालाब के बाद ही शहर के तीन तालाबों का पानी सिंघाड़ी नदी से निकासी होती थी। इस तालाब का करीब 30 प्रतिशत भाग अतिक्रमण की चपेट में है। वर्ष 2012 में तत्कालीन कलेक्टर राहुल जैन द्वारा इस तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। इसके बाद अब इस पर पहले से अधिक अतिक्रमण हो गया है। पिचले दिनों प्रशासन ने अतिक्रमण की मार्किंग की, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।

गायत्री मंदिर तालाब में हो गए कामर्शियल निर्माण
जवाहर रोड पर गायत्री मंदिर के ठीक सामने बेहद सुंदर छोटा सा तालाब था। यह तालाब राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 616/2 में 3.602 हेक्टेयर (9 एकड़) रकवा दर्ज है। इस तालाब पर भी अतिक्रमण की मार है। वर्ष 2012 में कलेक्टर राहुल जैन ने इस तालाब को भी पूरी तरह से अतिक्रमणमुक्त कराया था। इसके बाद के अधिकारियों ने अतिक्रमण से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए बल्कि 44 आरे जमीन दो व्यापारियों को बेच दी है। इस तालाब के दो तरफ से कामर्शियल निर्माण हो गए हैं इससे यह तालाब अब गंदगी भरे मैदान में तब्दील हो गया है।

रानी तलैया में हो गई प्लाटिंग
शहर के बीचोंबीच राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 2523/2 में 3.035 (करीब 8 एकड़) पर रानी तलैया दर्ज है। प्रताप सागर जब ओवरफ्लो होता था तो इसका पानी रानी तलैया में पहुंचता था। अब न तो इसमें प्रताप सागर का पानी पहुंचने का नाला बचा है और न ही इसमें बारिश का पानी पहुंच पाता है। इस कारण में बेहद कम पानी रहता है। भूमाफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि रानी तलैया में प्लाटिंग कर डाली।

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