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छह तरह के मिल रहे कैंसर मरीज, एक लाख स्क्रीनिंग में 5 हजार में मिले लक्षण,जान बचाने जागरुक कर रही डॉक्टर

कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए गांव-गांव में कैंसर जागरुकता व स्क्रीनिंग शिविर लगाए जा रहे हैं। ताकि फर्स्ट स्टेज में बीमारी की पहचान हो सके और मरीज की जान बचाई जा सके।

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cancer screening and awarness camp

स्क्रीनिंग एवं जागरुकता शिविर

जिले में कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। जिला अस्पताल में पदस्थ कैंसर नोडल डॉ. श्वेता गर्ग के नेतृत्व में चलाए जा रहे जांच अभियान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिले में 100000 से अधिक लोगों की कैंसर जांच हो चुकी है, जिनमें लगभग 5000 लोगों में बीमारी के लक्षण मिले हैं। इनमें से 2000 मरीज पहली स्टेज पर जांच और इलाज मिलने से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए गांव-गांव में कैंसर जागरुकता व स्क्रीनिंग शिविर लगाए जा रहे हैं। ताकि फर्स्ट स्टेज में बीमारी की पहचान हो सके और मरीज की जान बचाई जा सके।

सबसे अधिक ओरल कैंसर के मामले

डॉ. गर्ग के अनुसार, जांच में सबसे अधिक मरीज ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) से पीडि़त पाए गए हैं। जो पुरुषों में अधिक पाया गया। इसके अलावा सर्वाइकल, ब्रेस्ट कैंसर ब्लड, ओवरी और स्किन कैंसर के मरीज भी सामने आए हैं। जिसमें महिलाओं में ओवरी और ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा सामने आए हैं।

-ओरल कैंसर- लगभग 50 प्रतिशत मरीज (मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा)

-सर्वाइकल कैंसर(महिलाएं)- लगभग 18 प्रतिशत (एचपीव्ही संक्रमण, स्वच्छता की कमी)

-ब्रेस्ट कैंसर(महिलाएं)- लगभग 30 प्रतिशत (हार्मोन असंतुलन, आनुवंशिक कारण)

-अन्य कैंसर- लगभग 2 प्रतिशत ब्लड, ओवरी, स्किन कैंसर के सीमित लेकिन गंभीर मामले

300 से अधिक गांवों में जांच शिविर, जागरूकता अभियान

डॉ. गर्ग की टीम ने अब तक 300 से अधिक गांवों में कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर लगाए हैं। शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को कैंसर के लक्षण, रोकथाम और इलाज के बारे में बताया गया। स्कूलों, पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर जानकारी दी गई, विशेष रूप से महिलाओं को सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों के प्रति सतर्क किया गया।

गुटखा बना युवाओं के लिए जानलेवा

ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू और गुटखा की लत युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। खेतों में काम करने वाले युवक लंबे समय तक गुटखा सेवन करते हैं, जिससे 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी कैंसर के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। डॉ. गर्ग ने बताया कि यदि समय पर जांच हो जाए तो कैंसर का इलाज संभव है। लगातार घाव रहना, गांठ बनना, खून बहना, वजन घटना जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत जांच कराना चाहिए।

आनुवंशिक कारण भी बड़ी वजह

महिलाओं में कई ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर के मामले ऐसे परिवारों में मिले हैं, जहां पहले किसी सदस्य जैसे दादी, नानी, मां, बहन को कैंसर हो चुका है। ऐसे परिवारों को नियमित जांच की सलाह दी जाती है। अगर जल्द ही व्यापक प्रयास नहीं किए गए तो बुंदेलखंड कैंसर का नया हॉट स्पॉट बन सकता है। आज भी लोग झाड़-फूंक और झोला छाप डॉक्टरों की ओर ज्यादा झुकते हैं, जिससे इलाज में देर हो जाती है। कैंसर से लडऩे के लिए सरकारी योजनाओं के साथ-साथ समाज की भी भागीदारी जरूरी है। अधिक जांच शिविर, स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान और गांवों तक इलाज की सुविधा पहुंचाना आवश्यक है।

फैक्ट फाइल

कुल जांच- 100000

कैंसर लक्षण वाले मरीज- 5000

पूरी तरह ठीक हुए मरीज- 2000

प्रमुख कैंसर- ओरल (50), ब्रेस्ट (30) प्रतिशत, सर्वाइकल (18), अन्य (2) प्रतिशत

जांच शिविर- 300 गांवों में

अनुमानित जनसंख्या- 20 लाख

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