
कानपुर सागर नेशनल हाइवे
लंबे इंतजार के बाद कबरई -सागर फोरलेन के फेज 3 और 4 के टेंडर हो गए हैं। छतरपुर जिले की सीमा में साठिया घाटी से चौका गांव तक तीसरे फेज में और चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक चौथे फेज में कुल 98 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण किया जाना है। तीसरे फेज में 55 किमी लंबा फोरलेन एक हजार 8 करोड़ रुपए और चौथे फेज में 43 किमी लंबी सडक़ ?997 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाएगी। तीसरे फेज का ठेका एमकेसी इंफ्राट्रक्चर और चौथे फेज का ठेका बेलजी कंपनी को मिला है। इससे छतरपुर जिले में निर्माण कार्य में तेजी आएगी और इस महत्वपूर्ण हाइवे के निर्माण से जिले के कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
हाइवे वर्ष 2026-27 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फोरलेन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बाद में इसे आसानी से सिक्स लेन में बदला जा सकेगा, जिससे यातायात की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। छतरपुर जिले से निकलने वाला 223.7 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन एमपी और यूपी को जोड़ेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच आवागमन में तेजी आएगी। यह फोरलेन सागर से निकलते हुए बंडा, शाहगढ़, बड़ामलहरा, छतरपुर, गढ़ी मलहरा, श्रीनगर और महोबा होते हुए बनाया जा रहा है।
महाराजपुर, छतरपुर, बिजावर और बड़ा मलहरा के 57 गांवों की ज़मीन का अधिग्रहण किया गया है। इस फोरलेन की अनुमानित लागत 2653 करोड़ रुपए आंकी जा रही है, और इसे बाद में सीधे लखनऊ से जोडक़र एक आर्थिक कॉरिडोर बनाने की योजना है। इससे बुंदेलखंड के लोगों को न केवल बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी होगी, जो क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।
उक्त फोरलेन के पहले फेज के तहत सागर से मोहारी गांव तक 50 किलोमीटर लंबी सडक़ का निर्माण एनएचएआई की सागर इकाई द्वारा किया जा रहा है। पहले फेज में सागर से दलपतपुर तक लगभग 70 प्रतिशत काम हो चुका है। शेष 182 किलोमीटर लंबा फोरलेन चार पेजों में किया जाएगा, जिसमें एनएचएआई की छतरपुर इकाई द्वारा काम कराया जाएगा। दूसरे फेज में मोहारी से सोनिया घाटी (हीरापुर) तक 39 किलोमीटर का काम जीत इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी कर रही है, जिसकी लागत ?351 करोड़ है। इसी प्रकार, पांचवे फेज के तहत मप्र की सीमा पर स्थित कैमाहा बैरियर से महोबा होते हुए कबरई तक 45 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण बंसल कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है।
इस फोरलेन प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अप्रेल 2023 में मंजूर की गई थी। डीपीआर की मंजूरी के बाद भूतल परिवहन विभाग ने इस फोरलेन के निर्माण को 2026 तक पूरा करने की टाइमलाइन तय की थी, लेकिन एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सकी। इसके चलते इस काम में एक साल की देरी हुई है। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा एनएचएआई की छतरपुर इकाई के पास है, लेकिन छतरपुर इकाई में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीडी) का पद तीन महीने तक खाली रहा। जून माह में तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीएल चौधरी को सीबीआई ने 10 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद अब नए अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया फिर से शुरू की गई, जिससे फेज 3 और 4 के टेंडर हो सके हैं।
कबरई - सागर फोरलेन के फेज 3 और 4 के टेंडर हो जाने से इस महत्वपूर्ण परियोजना के शीघ्र कार्यान्वयन की उम्मीद जताई जा रही है। यह फोरलेन भारत माता श्रृंखला के अंतर्गत बनाया जा रहा है और इसे 2027-28 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की नई राह खुलेगी।
देवेंद्र चापेकर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई, छतरपुर
Updated on:
03 Mar 2025 10:35 am
Published on:
03 Mar 2025 10:34 am
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