
The painting of Manmoha, soapapatai Sabane cast of the back
छतरपुर/खजुराहो। पर्यटन नगरी खजुराहो में २० से २७ फरवरी तक चले नृत्य समारोह में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जूनियर एवं सीनियर चित्रकारों की कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें जूनियर कलाकारों की कार्यशाला 20 से 22 फरवरी एवं सीनियर कलाकारों की कार्यशाला 24 से 26 फरवरी तक आयोजित की गई।
देश के अलग अलग भागों से अलग-अलग शैली के चित्रकारों ने नृत्य समारोह के दौरान प्रत्यक्ष रूप से अपनी चित्र निर्मिती को दर्शकों के स मुख प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान देशी एवं विदेशी पर्यटकों की जिज्ञासु भीड़ प्रतिदिन इन कलाकारों की सिद्ध कूचियों को अप्रतिम चित्र रचते देख रोमांचित होती रही।
समकालीन चित्रकारों के साथ-साथ इस शिविर में देश की पारंपरिक, लोक शैली एवं आदिवासी चित्र शैली भी प्रदर्शित हुई। समकालीन चित्र शैली के कलाकारों में नई दिल्ली से सर्वश्री रामचंद्र पोकले, डॉ.अंजनी प्रसाद, जे.पी.सिंह, वड़ोदरा से जितेन्द्र बावनी, कृष्णा पंड्या, नागपुर से सुभाष बाभुलकर, रघु नेवरे, विकास जोशी, मुंबई से ज्योत्सना कदम, भोपाल से अनिल गायकवाड़ ने सहभागिता की7मालवा की लोक शैली का चित्रांकन उज्जैन से श्रीमती कृष्णा वर्मा, उषा बागोदिया व इंदौर की आशा गुप्ता ने। राजस्थान की चित्र शैली का अंकन जयपुर के खुश नारायण जांगिड एवं आशाराम मेघवाल ने सात हिमाचल की कांगड़ा शैली के प्रसिद्ध चित्रकार पद्मश्री विजय शर्मा एवं लाल सिंह तथा धनीराम खुशदिल ने सात महाराष्ट्र की वारली जनजातीय चित्र शैली का प्रदर्शन श्रीमती मानकी वायडा ने सात तथा दक्षिण की तिरुपति चित्र शैली का अंकन डॉ. वेंकटेश्वरलू सागर ने किया सात हिमाचल के पद्मश्री कलाकार श्री विजय शर्मा ने खजुराहो के शिल्पों को देश की कला का अतुलनात्मक प्रमाण बताया।
नृत्य समारोह देखने आये पर्यटकों ने अभिनव चित्रकारी के इस अभिनय आयोजन की सराहना की। एक ही स्थान पर देश की विभिन्न चित्रांकन शैली के अप्रतिम दर्शन से दर्शकों को रंगों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता के दर्शन सहज ही हो गए। कई जिज्ञासु दर्शकों ने अगले वर्ष इस तरह की गतिविधि से जुडऩे की इच्छा भी जताई।
Published on:
01 Mar 2018 10:00 am

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