
प्रस्तुति देते कलाकार
छतरपुर. खजुराहो नृत्य महोत्सव में नवाचारों से सजी इन नृत्यों की कलात्मक प्रस्तुतियों ने महोत्सव में दूर दराज से आए रसिकों के अंतर्मन को गुदगुदा दिया। पांचवे दिन पंचानन भुयान का ओडिसी, अमीरा पटाकर और अनुसिन्हा का कथक एवं राजश्री होल्ला एवं रेखा सतीश का कुचिपुड़ी नृत्य देख दर्शक मुग्ध हो गए।
नृत्य और ताल के अनूठा संगम से पेश किया रावण का यज्ञ
पहली प्रस्तुति में गुरु पंचानन भुयान और उनके समूह का ओडिसी नृत्य हुआ। उन्होंने अपने नृत्य की शुरुआत मंगलाचरण से की। शांताकारं भुजगशयनम श्लोक पर भगवान विष्णु को याद किया गया। मर्दल की ताल पर नर्तकों ने भाव प्रवण ढंग से यह प्रस्तुति दी। अगली प्रस्तुति में उन्होंने नृत्य और ताल के अनूठा संगम की पेश दी। रावण नृत्य नाटिका के एक अंश को इस प्रस्तुति में लिया गया था, जिसमे रावण शिव को प्रसन्न करने यज्ञ कर रहा है। इसमें ओडिसी के साथ मयूर भंज और छाऊ नृत्य शैलियों को भी समाहित किया गया था। जिससे यह प्रस्तुति और रोमांचक बन पड़ी। नृत्य का समापन लोकनाथ पटनायक द्वारा रचित उडिय़ा के भक्ति गीत सजा कंजा नयना कुंजे आ री से किया। राग आहिरी और ताल खेमटा की यह रचना खूब सराही गई।
नृत भावों से किया सीता स्वयंवर का बखान
दूसरी प्रस्तुति पुणे की सुश्री अमीरा पाटनकर और उनके साथियों का सुमधुर कथक नृत्य हुआ। अमीरा ने राम वंदना से अपने नृत्य का आरंभ किया। मंगलाचरण स्वरूप की गई इस रचना में सीता स्वयंवर सेतु लंघन, रावण दहन की लीला को अमीरा व साथियों ने बड़े ही सलीके से नृत भावों से पेश किया। अगली प्रस्तुति चतुरंग की थी। राग देश की इस रचना में तराना सरगम, साहित्य,नृत्य के बोलों का अनोखा और सुंदर समन्वय देख दर्शक मुग्ध हो गए। अमीरा ने अगली प्रस्तुति में राग पीलू में निवद्ध ठुमरी - ऐसी मोरी रंगी है श्याम पर भाव नृत्य पेश किया। इसके बाद त्रिविधा में शुद्ध नृत्य के कुछ तत्व दिखाए, जिनमे परमेलु और नटवरी बोलों की अनूठी बंदिशे शामिल थी।
भगवान गणेश की बुद्धिमता का किया गुणगान
महोत्सव में बैंगलोर से आईं राजश्री होल्ला और रेखा सतीश की जोड़ी ने भी अपने कुचिपुड़ी नृत्य से खूब रंग भरे। उन्होंने बतौर मंगलाचरण गणेश वंदना से नृत्य का आगाज किया। आदत और सेत्तो नाता रागम की इस रचना में राजश्री और रेखा ने भगवान गणेश की बुद्धिमता को भावों से सब के सामने रखा। अगली प्रस्तुति में उन्होंने राग मालिका में पगी और मिस्त्र चापू ताल में निबद्ध भक्त प्रहलाद पट्टाभिषेकम की कहानी को नृत्य के जरिए पेश किया। इसमें प्रहलाद की भक्ति हिरणकयप के बध को ओजपूर्ण भावों से पेश किया गया। राजश्री और रेखा ने दुर्गा तरंगम में महिषासुर मर्दिनी की कहानी को कुचीपुड़ी शैली में अभिव्यंजक अंग संचालन से प्रदर्शित किया। राजश्री और रेखा ने राग अहीर भैरव और आदि ताल की रचना पिबारे राम रसम से राम स्तुति कर नृत्य का समापन किया।
भगवान राम की बताई महिमा
सभा का समापन दिल्ली से आईं डॉ अनु सिन्हा और उनके साथियों के कथक नृत्य से हुआ। उन्होंने मंगलाचरण में गणेश वंदना से नृत्य का आरंभ किया। राग देश और चोटी की बंदिश प्रथम सुमिरन श्री गणेश के जरिए उन्होंने भगवान गणेश की बुद्धिमता शक्ति और समृद्धि को भावों में पिरोकर पेश किया। अगली प्रस्तुति में उन्होंने जय राम रमा पर भगवान राम की महिमा को सामने रखा। भैरवी की इस रचना में प्रेम समर्पण को बड़े ही सलीके से उन्होंने पेश किया। अगली पेशकश शिव आराधना की थी। शंकर
अति प्रचंड मालकौंस के सुरों में भीगी और चोटी में बंधी इस रचना में उन्होंने शिव के प्रति आस्था और भक्ति के भावों को बड़े ही सजीव भावों में पिरोया। नृत्य का समापन उन्होंने ठुमरी -ऐसी हठीलो छैल पर भाव नृत्य से किया। राधा कृष्ण के प्रेम को इस ठुमरी से सजीव करते हुए अनु ने रसिकों को मुग्ध कर दिया।
Published on:
25 Feb 2024 10:43 am

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