
कोरोना से मृत्यु पर शव शहर से बाहर दफनाने की गुहार, याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
ईरोड. लॉक डाउन के समय आने के कारण इलाज करने से निजी अस्पताल वाले इंकार किए, इस कारण 7 वर्षीय आस्थमा पीडि़त की मौत हुई जिसे साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। उस निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांगे लेकर परिजन के ज्ञापन देने पर जिला कलेक्टर कदिरवन की तरफ से आरटिओ जांच की आदेश दि गई। जिले के मोडकुरिची इलाके में कोट्रवेल नामक व्यक्ति इलेक्ट्रिशियन के तौर पर काम करता था। उसकी और पत्नी महेश्वरी के दो बच्चे थे। छोटा बेटा वितुल 7 उसी इलाके के निजी स्कूल में 2वीं कक्षा की पढ़ाई करता था। बचपन से वह अस्थमा से पीडि़त था। कोल्लंपालयम स्थिति निजी अस्पताल में उसकी हमेशा से इलाज होती रही। जब भी उसे साँस लेने में तकलीफ हुई तो उसे उसी अस्पताल में ले जाया गया और 1 घंटे इलाज करने के बाद उसकी डिस्चार्ज भी हो जाती। रविवार सुबह 6.30 बजे उसे हमेशा की तरह साँस लेने में तकलीफ हुई। जैसे हर वक्त होता आया वैसे ही बच्चे को उसी निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन वहा उपस्थित कर्मचारी बोले कि लॉक डाउन के कारण अन्य मरीजों की इलाज करने से मना है तो बच्चे को कही और ले जाइए।
बच्चे के परिजन परेशान हुए और बोले कि इतने सालों से यही पर इसकी इलाज हो रही है और बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर सारे रिकॉर्ड भी आप ही के पास है, लेकिन अस्पताल के कर्मचारी नहीं माने और अपने बात पर अड़े रहे। मजबूरन बच्चे को कही और ले जाना पड़ा, लेकिन साँस नही ले पाने और वक्त पर इलाज नही मिलने के कारण रास्ते में ही बच्चे की मौत हुई। अस्पताल वालों के इस बर्ताव के कारण बच्चे के परिजन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य विभाग अधिकारी और जिला कलेक्टर से अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए ज्ञापन दिया। इस दौरान जिला कलेक्टर कदिरवन ने आरटिओ जांच की आदेश दी.
Updated on:
28 Apr 2020 04:21 pm
Published on:
28 Apr 2020 02:09 pm
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