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रेशमी धागों के बीच बढ़ रही चांदी के राखियों की चमक

भाई-बहन के अटूट रिश्ते के पर्व रक्षाबंधन के करीब आने के साथ ही राखियों का बाजार भी सज गया है। बाजार में अलग-अलग डिजाइन और आकार की राखियां बाजार में हैं। रेशम के धागों से बनी परंपरागत राखियों के साथ ही बाजार में सोने-चांदी से बनी राखियां भी उपलब्ध हैं।

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rakhi

रेशमी धागों के बीच बढ़ रही चांदी के राखियों की चमक

कोयम्बत्तूर. भाई-बहन के अटूट रिश्ते के पर्व रक्षाबंधन के करीब आने के साथ ही राखियों का बाजार भी सज गया है। Coimbatore बाजार में अलग-अलग डिजाइन और आकार की राखियां बाजार में हैं। रेशम के धागों से बनी परंपरागत राखियों के साथ ही बाजार में सोने-चांदी से बनी राखियां भी उपलब्ध हैं।
बदलते दौर के साथ पवित्र धागों के इस त्योहार का स्वरुप भी बाजार में दिख रहा है। परंपरागत रुप से बहनें अपने भाई को रेशम का धागा बांधकर इस पर्व को मनाती रही हैं लेकिन अब इनकी जगह डिजाइन वाली आकर्षक राखियों ने ले ली है। बाजार में अलग-अलग वैरायटी और उम्र के हिसाब से सस्ती से लेकर महंगी राखियां उपलब्ध हैं। रेशमी धागे और मोती जडि़त राखियों के अलावा सोने और चांदी की राखियां भी बाजार में हैं। सर्राफा बाजार में भी अलग-अलग डिजाइन व आकार की राखियां उपलब्ध हैं। बच्चों के लिए कार्टून चरित्र और लाइट व म्यूजिक वाली राखियों की मांग है जबकि बड़े लोगों के अलग-अलग डिजाइन की राखियों की मांग है। ब्रेसलेट, रुद्राक्ष और कड़े वाली राखियां भी बाजार में उपलब्ध हैं। बाजार में 10 रुपए की साधारण राखियों से लेकर महंगी डिजाइनर राखियां भी बिक रही हैं।
राखी को लेकर पसंद में आ रहे बदलाव की बात कारोबारी भी मानते हैं। आधुनिकता और फैशन के दौर में रेशम और सूती धागों से बनी राखियों की मांग घटी है और इनकी जगह फैंसी और प्रिंटेड राखियों की मांग ज्यादा है। नई पीढ़ी को रेशमी धागे की जगह सोने-चांदी की राखी ज्यादा भा रही है। पिछले कुछ सालों में सोने-चांदी के राखियों की मांग बढ़ी है। आभूषण कारोबारियों का कहना है कि सोना ज्यादा महंगा होने के कारण चांदी की राखियों की मांग अधिक है। हालांकि, इसकी मांग भी सिर्फ एक वर्ग विशेष तक सीमित है। खासकर धनाढ्य वर्ग के युवाओं में ही इसका क्रेज है।
चांदी की राखियों की रेंज300 रुपए से हो रही है। नए दौर में भी सीमित ही कच्चे धागों से बनी राखियों की मांग बनी हुई है। इसका उपयोग देवी-देवताओं को चढ़ाने या घरों के द्वार पर बांधने के लिए किया जाता है। ऐसी राखियां एक-दो रुपए प्रति नग की दर से गुणवत्ता के हिसाब से मिल रही हैं।
भाइयों से दूर रहने वाली बहनों ने पहले ही डाक या कूरियर से राखियां भेज दी हैं। बहनों से दूर रहने वाले भाइयों के पास ही राखियां पहुंचनी शुरू हो गई है। बाजार के अलावा ऑनलाइन भी लोग राखियां और बहन को देने के लिए उपहार खरीद रहे हैं।

Coimbatore शहर में हर साल राखी की मांग एक जैसी रहती है, ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता है। राखियां खरीदने वाले अधिकांश ग्राहक मूलत: उत्तर भारतीय होते हैं। राखी खरीदने वाले दक्षिण भारतीय ग्राहकों की संख्या कम होती है। बाजार में 10 से लेकर 400 रुपए तक राखियां उपलब्ध हैं। उच्च वर्ग के लोगों में ज्यादातर चांदी से बनी राखियों की मांग है।
बख्तावरमल एम, शुक्रवारपेट