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कोरोना ने तोड़ी सिरमुगई साड़ी उद्योग की कमर, लागत मूल्य पर बेचने का फै सला

सिल्क की साड़ी के लिए प्रसिद्ध सिरमुगई के बाजार को कोरोना ने ठंड़ा कर दिया है। माल बना हुआ पड़ा है पर शादी समारोह के टलने की वजह से बिक नहीं पा रहा। लॉकडाउन ने सिल्क साड़ी के कारोबार की कमर तोड़ दी है। इस समस्या से उबरने के लिए यहां के कई व्यवसायियों ने फिलहाल लागत मूल्य पर साड़ी बेचने का फैसला किया है।

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कोरोना ने तोड़ी सिरमुगई साड़ी उद्योग की कमर, लागत मूल्य पर बेचने का फै सला

कोरोना ने तोड़ी सिरमुगई साड़ी उद्योग की कमर, लागत मूल्य पर बेचने का फै सला

कोयम्बत्तूर. सिल्क की साड़ी के लिए प्रसिद्ध सिरमुगई के बाजार को कोरोना ने ठंड़ा कर दिया है। माल बना हुआ पड़ा है पर शादी समारोह के टलने की वजह से बिक नहीं पा रहा। लॉकडाउन ने सिल्क साड़ी के कारोबार की कमर तोड़ दी है। इस समस्या से उबरने के लिए यहां के कई व्यवसायियों ने फिलहाल लागत मूल्य पर साड़ी बेचने का फैसला किया है। सिरमुगई हैंडलूम वीवर्स एंड सेलर्स एसोसिएशन की बैठक में तय किया गया कि लागत मूल्य पर साड़ी बेचने के अलावा कोई चारा नहीं है। मेट्टूपालयम के पास स्थित सिरुमुगई कस्बे की पहचान यहां की साडिय़ों से है। पिछले साल महाबलिपुरम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति को सिरुमुगई में बना सिल्क का शाल भेंट किया था। यहां करीब 5,000 से अधिक हथकरघे हैं। आमतौर पर सिल्क के अलावा सूती साड़ी भी बड़ी मात्रा मेंं बनाईजाती है। शादी के सीजन में यहां की साडिय़ों की पूरे राज्य औक देश के दूसरे हिस्सों में बेहद मांग रहती है, लेकिन अभी नाममात्र की मांग है। जबकि 10,000 से अधिक लोग आजीविका के लिए हथकरघे पर निर्भर हैं। कोरोना की वजह से बुनकर परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सभी समस्याओं पर विचार के लिए एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई। इसमें तया किया गया कि हमें ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कीम लागू करनी पड़ेगी। कोरोना दौर में हर वर्ग के लोगों की खरीद क्षमता घट गई है, लेकिन हमें भी अपना धंधा चलाना है। इसलिए लागत मूल्य पर साड़ी बेची जाएं। अध्यक्ष नागराज के अनुसार व्यवसायी व बुनकर 15 जून से 16 अगस्त 2020 तक लागत मूल्य पर साडियां बेचेंगे। इससे उद्योग को फिर से खड़े होने में मदद मिलेगी। साथ ही हजारों बुनकर परिवारों को सहारा मिलेगा।