आचार्य ने कहा कि परमात्मा और सद्गुरू हमारी आत्मा के सच्चे संबंधी हैं। बाकी शरीर के संबंधी, धन, रूप, स्वजन, गाड़ी, बंगला स्वार्थ संबंधी हैं। तीर्थंकर परमात्मा ने केवल ज्ञान के जरिए जगत कल्याण के लिए धर्म का मार्ग बताया है। रोगों के विकार के लिए दवाओं की तरह ही आत्मा के रोगों को दूर करने के लिए परमात्मा के वचन को साथ रखना जरुरी है। जैसे अनिच्छा से शक्कर खाने पर भी वह मिठास ही देती है उसी प्रकार अनिच्छा से प्रवचन सुनने के बाद आचरण करने पर भी आत्महित होता है। प्रवचन से ही आत्मा के रोगों का पता व उनको दूर करने का उपाय मिलता है। उन्होंने कहा कि आत्मिक शुद्धि के लिए नियमित प्रवचन का श्रवण करना चाहिए।
भाव यात्रा कार्यक्रम 4 जुलाई को
जीरावाला पाश्र्वनाथ की भावयात्रा का संगीतमय कार्यक्रम ४ जुलाई को सुबह ९ बजे शुरू होगा। १० जुलाई को आरएस पुरम स्थित बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन संघ में ८.३० बजे गाजे बाजे के साथ चातुर्मासिक प्रवेश होगा।