
मनुष्य जीवन में ही धर्म आराधना संभव
कोयम्बत्तूर. संसार रूपी नरक और देवताओं के जीवों का वैक्रीय शरीर होने के कारण उनके जीवन में धर्म की आराधना कर पाना संभव नहीं है। धर्म को पाया हुआ धर्मी देवता प्रतिफल मनुष्य के रूप में जन्म की इच्छा करता रहता है, क्योंकि पाप क्रिया के त्याग स्वरूप विरति धर्म की आराधना मात्र मनुष्य ही कर सकते हैं।
यह बात जैन आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन ट्रस्ट की ओर से चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत जैन मैन्योर अपार्टमेंट में आयोजित धर्मसभा में कही। इंद्र महाराज भी सिंहासन पर बैठने के बाद विरती धर्म के आराधकों को वंदन करते हैं। वे जानते हैं कि वैभव एवं सुख समृद्धि धर्म आराधना का फल है।
उन्होंने कहा कि पशुओं के जीवन में पराधीनता, अज्ञानता और भूख के कारण पशुओं की दिनचर्या भोजन की तलाश में ही पूरी हो जाती है। इसलिए धर्म की आराधना उनके लिए संभव नहीं। केवल मनुष्य जीवन में ही धर्म की संपूर्ण आराधना संभव है।
धर्म की आराधना के लिए आलंबन, अरिहंत, सिद्ध आचार्य, उपाध्याय, साधु दर्शन, ज्ञान, चारित्र व तप स्वरूप नौ पदों की आराधना होती है। इन नौ पदोंं की आराधना से ही जीवात्मा समस्त कर्मों से मुक्त हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष आश्विन व चैत्र मास की सप्तमी से पूर्णिमा तक इन नौ पदों के आयंबिल तप के साथ त्रिकाल देव नंदन, प्रतिक्रमण, कायोत्सर्ग, प्रदक्षिणा, स्वस्तिक की रचना आदि भाव पूर्वक करनी चाहिए। इन नौ पदों में समग्र जैन शासन का समवतार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इन आराधना की योग्यता पाने के लिए संतों के गुणों को आत्मसात करना होगा। अर्थात खंतों यानि क्षमावान, क्रोध आदि कषायों को जीतने वाला, दंतों यानि इंद्रियों को जीतने वाला, संतों यानि मानसिक विकारों से मुक्त होकर मन में शुभ भावनाओं को भावित करने वाला बन सकेगा। नवपद की श्रेष्ठ आराधना करके श्रीपाल महाराज व मयणा सुंदरी ने इस लोक में राज्य, सुख समृद्धि, परलोक में देवादि गतियों की शुभ परंपरा व परंपरा मुक्ति प्राप्त का श्रेष्ठ आलंबन दिया है। नवपदीय आराधना से कोढ़, क्षय, भगंदर जैसे महारोग नष्ट हो जाते हैं। अंगों के दोष, अंधापन आदि नहीं होते।
आज से राजस्थानी भवन में प्रवचन
शनिवार से आचार्य के प्रवचन राजस्थानी संघ भवन में प्रतिदिन सुबह9.15 बजे होंगे। रमेश बाफना परिवार की ओर से नौ आयंबिल की आराधना कराई जाएगी।10.45 बजे से बहुफणा जिनालय में 18 अभिषेक का मंगल विधान होगा।
Published on:
05 Oct 2019 12:27 pm
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