
उपवास भोजन की आसक्ति तोडऩे का माध्यम
कोयम्बत्तूर. जैन आचार्य विजय रत्नसूरीश्वर ने कहा कि आहार आसक्ति तोडऩे के लिए तप धर्म का विधान है। देह को टिकाने के लिए आहार की आवश्यकता रहती है। यदि आहार देह साधन के बजाय स्वाद का कारण बन जाए तो आहार देह के लिए विष भी बन जाता है।
वह यहां जैन मैनोर अपार्टमेंट में बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन ट्रस्ट की ओर से चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में आहार की आसक्ति को तोडऩे के लिए उपवास आदि तप का विधान बताया गया है। उप अर्थात समीप व वास अर्थात रहना। उपवास में आत्मा के समीप रहना होता है। उपवास में आहार की आसक्ति न टूटे तो उपवास बंधन बन जाता है। उपवास केवल आहार त्याग की कोई स्थूल प्रक्रिया नहीं है। किंतु आसक्ति त्याग/इंद्रिजय की सूक्ष्म प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि उपवास में आहार का त्याग करना स्थूल प्रक्रिया है लेकिन वास्तव में उपवास में अपनी चेतना को आत्मा की ओर केन्द्रित किया जाता है। भोजन पर अपना ध्यान देह पर होता है लेकिन उपवास के दौरान देहिक प्रवृत्ति का त्याग करने से चेतना आत्मा पर आसानी से केन्द्रित हो जाती है।
उपवास आत्मानुशासन की श्रेष्ठ प्रक्रिया है। उपवास के द्वारा चित्त, शांत, निराकुल, निष्काम व निर्लिप्त बनना चाहिए। उपवास राग की आग को जीतने का प्रयत्न है। इससे आत्म वैभव बढ़ता है आत्मा शुद्ध बनती है। उपवास से इंद्रियों की चंचलता पर भी अंकुश पाया जा सकता है। उपवास से कर्मों की निर्जरा होती है। जिसने आसक्ति को तोड़ डाला ऐसे योगी पुरुष आहार करते हुए उपवासी कहलाते हैं।
उपवास देह के विजातीय द्रव्यों को समाप्त करता है और शरीर में पैदा हुए कूड़े को नष्ट कर देता है। उपवास से पाचन प्रणाली आमाशय व रक्षक अवयवों को शारीरिक क्रिया की दृष्टि से विश्राम मिलता है। उपवास के बाद खाद्य का पाचन व पोषण का योग तेज हो जाता है। उपवास रोग निवारण का श्रेष्ठ साधन है। रुग्णावस्था में पशु सबसे पहले आहार छोड़ देता है लेकिन मानव बीमारी में भी स्वादिष्ट व्यंजन खाना नहीं छोड़ता। आचार्य ने कहा कि उपवास से मानसिक क्षमता बढ़ती है। पोषण शास्त्र के विद्वान कहते हैं कि उपवास काल में पाचन संस्थान बड़ी मात्रा में संचित व्यर्थ पदार्थ को जलाता व बाहर निष्कासित करता है। उपवास तो प्रकृति की मांग है। मनुष्य व पक्षी के शरीर में जब विजातीय तत्व बंद हो जाते हैं पाचन तंत्र विश्राम चाहता है। उपवास से पाचन तंत्र को विश्राम मिलने के साथ विजातीय तत्व नष्ट हो जाते हैं।
Published on:
19 Oct 2019 01:06 pm
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