
पर्युषण पर्व का सार है क्षमापना
कोयम्बत्तूर. जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा है कि समस्त श्रुत ज्ञान का सार नवकार महामंत्र है। जैसे एक छोटे से चेक में लाखों-करोड़ों रुपए की शक्ति है। उसी तरह नवकार महामंत्र है। आचार्य बुुधवार को बहुफणा पाश्र्वनाथ जिनालय में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में आहार की आशक्ति रहती है।युवावस्था में धनार्जन, मौज-शौक की और वृृद्धावस्था में व्यक्ति को मरण का भय हैरान करता है।
आचार्य ने कहा कि शरीर के प्रति ममत्व के कारण ही व्यक्ति स्वादिष्ट भोजन, प्रिय वस्तु, धन-सम्पति को छोडऩे को तैयार हो जाते हैं पर समय आने पर मजबूरी में ही इस शरीर को छोड़ कर परलोक की ओर चला जाना पड़ता है।
आचार्य ने कहा कि जैसे भाड़े के मकान में हम तब तक ही रह सकते हैं, जितना किराया अदा किया है। उसी तरह इस शरीर में भी व्यक्ति तभी तक रह सकता है, जिस समय तक का पुण्य का भाड़ा पूर्व जन्म में भरा हो। उन्होंने कहा कि कर्मों के बंधनों को तोडऩे का सर्वश्रेष्ठ उपाय नवकार महामंत्र की साधना -आराधना है।धर्म सभा में बताया गया कि २९ नवम्बर को सुबह साढ़े सात बजे श्री बहुफणा पाश्र्वनाथ जिनालय में सत्रह भेदी पूजा व ध्वजारोहण होगा। सुबह साढ़े नौ बजे प्रवचन होंगे।
Published on:
28 Nov 2019 01:47 pm
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