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केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के जंगलों में दिखा नीलगिरि कडुवा!

तमिलनाडू, केरल और कर्नाटक में इन दिनों नीलगिरि कडुवा चर्चा का विषय बना हुआ है। बाघ का शरीर और कुत्ते के मुंह वाले इस वन्यजीव को तीनों राज्यों के जंगलों में अलग-अलग जगह दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।

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केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के जंगलों में दिखा नीलगिरि कडुवा!

केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के जंगलों में दिखा नीलगिरि कडुवा!

कोयम्बत्तूर. तमिलनाडू, केरल और कर्नाटक में इन दिनों नीलगिरि कडुवा चर्चा का विषय बना हुआ है। बाघ का शरीर और कुत्ते के मुंह वाले इस वन्यजीव को तीनों राज्यों के जंगलों में अलग-अलग जगह दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि वन विभाग इस तरह के किसी भी प्रकार के वन्यजीव होने की सम्भावना से इनकार कर रहा है।
लगभग 15 साल से वन्यजीवों के लिए काम कर रहे डीजो थॉमस के अनुसर यह वन्यजीव सबसे पहले केरल के त्रिवेंद्रम और त्रिश्शूर जिले के जंगलों में २०१४ में देखा गया है। इसकी पहचान होने से पहले स्थानी लोग इसे तेंदुआ समझते थे, लेकिन वन्यजीवों में स्थानी जानकारों से इसकी नीलगिरि कडुवा के रूप में पहचान हुई।

हर प्रदेश में अलग नाम
नीलगिरि कडुवा भले ही नीलगिरि के नाम से पहचाना जाता हो, लेकिन केरल, कर्नाटक और तमिलनाडू में इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है। नीलगिरि कडुवा को कर्नाटक में नाई हुली, केरल में पट्टी कडुवा और तमिलनाडू में नीलगिरि कडुवा के नाम से जाना जाता है। इन सभी का अर्थ कुत्ता बाघ है। डीजो थॉमस के अनुसार नीलगिरि कडुवा को अभी तक तीनों राज्यों में लगभग 300 लोगों ने देखने का दावा किया है।