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पोंगल पर्व का आगाज कल से

राज्य का सबसे बड़ा पर्व पोंगल का आगाज मंगलवार से होगा। तीन दिनों तक चलने वाले त्यौहार की तैयारियां शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जोर शोरों से कर दी गई है। इस मौके पर गुड़ चावल से बना मीठा व्यंजन बनाकर गायों को खिलाया जाएगा।

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Pongal

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कोयम्बत्तूर.राज्य का सबसे बड़ा पर्व पोंगल का आगाज मंगलवार से होगा। तीन दिनों तक चलने वाले त्यौहार की तैयारियां शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जोर शोरों से कर दी गई है। इस मौके पर गुड़ चावल से बना मीठा व्यंजन बनाकर गायों को खिलाया जाएगा।
स्थानीय नेहरु विद्यालय के पास मंदिर में पशुओं व गायों को सजाधजा कर लाएंगे व उसकी पूजा कर उसे पोंगल खिलाया जाएगा। शहरी क्षेत्र में जहां लोग नए कपड़े पहनते हैं। घरों में विशेष पोंगल बनाया जाता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में १५ व १६ जनवरी को माड्डा पोंगल के रूप में मनाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में जलीकुट्टी पर्व के रूप में मनाएंगे। इस दिन पशुओं व बैलों की दौड़ होती है।

नई फसल की कटाई के बाद प्रभु का धन्यवाद
पोंगल पर्व मूल में तमिल शब्द पुंगी से बना है पुंगी का अर्थ उबाल से है। चावल व गन्ने जैसी प्रमुख फसलों कटाई व भगवान से फसल उत्पादन व संपन्नता की कामना के साथ धन्यवाद देने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन घरों में लोग मिट्टी की नई हांडी गन्ने के रस व गुड़ के साथ चावल पकाया जाता है। इसे फैलने तक उबाला जाता है। उबाल को तमिल भाषा में पुंगी कहते हैं उबाल शुद्धता व नवीनता का परिचायक है। इस विशेष व्यंजन को पोंगल कहा जाता है। इसे गाय को खिलाया जाता है। पोंगल उत्सव के का आगाज करने के लिए शहर व ग्रामीण क्षेत्रो में तैयारियां अंतिम चरणों मेंं है।