
स्टील प्लांट की बिक्री : तमिलनाडु में गरमाई राजनीति, सीएम ने किया विरोध
कोयम्बत्तूर. केंद्र सरकार Central Government नेे घाटे में चल रहे सेलम इस्पात संयंत्र Salem Steel plant को बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने गुरुवार को सेलम सहित स्टील आथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) SAIL के तीन संयंत्रों को बेचने के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा जारी की। निविदा Tender आमंत्रित किए जाने के साथ ही तमिलनाडु ( Tamilnadu ) में भी इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक तरफ सेलम संयंत्र के कर्मचारी जहां शुक्रवार को चौबीस घंटे की सांकेतिक हड़ताल Strike पर चले गए वहीं Assembly विधानसभा मेंं भी यह मसला उठा और विपक्ष opposition ने सरकार से संयंत्र के निजीकरण को रोकने के लिए पहल करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार संयंत्र के निजीकरण को रोकने के लिए पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके AIADMK और डीएमके DMK के सांसद इस मसले को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
केंद्र सरकार के सेलम संयंत्र की 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए निविदा आमंत्रित करने के खिलाफ शुक्रवार को कर्मचारियों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक सुबह 6 बजे हड़ताल शुरू की। कर्मचारियों संयंत्र परिसर के सामने प्रदर्शन भी किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारे भी लगाए। कुछ कर्मचारियों ने संयंत्र जाने की कोशिश की तो उसे भी हड़ताली कर्मचारियों ने रोका। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार पहले भी कई बार इस संयंत्र का निजीकरण करने की कोशिश कर चुकी है लेकिन इस संयंत्र को किसी भी तरह बेचने पर आमदा है। कर्मचारियों का आरोप था कि सरकार संयंत्र के साथ ही 200 एकड़ खाली पड़ी जमीन को बेचने की तैयारी में है। कर्मचारियों का कहना था कि अगर केंद्र सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए मूल्य वाले इस संयंत्र को बेचने का फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक एक दिन की हड़ताल से एक हजार टन उत्पादन का नुकसान हुआ।
इसलिए बड़ा मुद्दा
यह संयंत्र राज्य के प्रमुख और वृहद सार्वजनिक उपक्रमों मेें से एक है। मुख्यमंत्री ई.के.पलनी स्वामी Edappadi K Palanisamy के गृह जिले सेलम में स्थित है और इसके कारण संयंत्र को बेचने का मामला राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण हो गया है। राज्य में सत्तारुढ़ एआईएडीएमके अभी भाजपा BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) NDA में शामिल है।
सेलम में 1981 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में सेलम आयरन वक्र्स नाम से सरकारी संयंत्र की स्थापना हुई थी। बाद में विस्तार के दौरान इसे आयरन से स्टील Steel वक्र्स में बदल दिया गया। इस संयंत्र में स्टेनलेस स्टील और कार्बोनेटेड स्टील का उत्पादन होता है। संयंत्र में करीब 1500 स्थाई कर्मचारी हैं जबकि एक हजार अस्थायी कामगार हैं। साथ ही दो हजार से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
विस में भी उठा मसला
सेलम संयंत्र के निजीकरण का मसला शुक्रवार को विधानसभा में भी उठा। डीएमके नेता एम. के. स्टालिन MK Stalin ने प्रश्नकाल के दौरान इस मसले को उठाते हुए कहा कि संयंत्र का निजीकरण रोकने के लिए राज्य सरकार को कदम उठाना चाहिए। स्टालिन ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री prime minister of india से मुलाकात कर इसका विरोध करना चाहिए। हमारे सांसद भी आपके साथ चलने के लिए तैयार हैं।
इस पर मुख्यमंत्री पलनीस्वामी ने कहा कि यह सच है कि केंद्र सरकार इस संयंत्र का विनिवेश करना चाहती है। इसके निजीकरण को रोकने के लिए हम कोशिश करेंगे। इस मसले पर हम प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों से मुलाकात करने की कोशिश करेंगे। राज्य के सांसदों को संसद के दोनों सदनों में इस मसले को उठाना चाहिए।
Published on:
05 Jul 2019 05:08 pm
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