भाई-बहन की नृशंस हत्या से सहम गया था कोवई

भाई-बहन की नृशंस हत्या से सहम गया था कोवई

Kumar Jeevendra | Updated: 02 Aug 2019, 03:55:31 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

करीब नौ साल पहले Coimbatore शहर स्कूल में पढऩे वाले भाई-बहन के अपहरण और हत्या की वारदात से सन्न रह गया था। मामले का मुख्य साजिशकर्ता बच्चों का पूर्व वैन चालक था।

कोयम्बत्तूर. करीब नौ साल पहले शहर स्कूल में पढऩे वाले भाई-बहन के अपहरण और हत्या की वारदात से सन्न रह गया था। मामले का मुख्य साजिशकर्ता बच्चों का पूर्व वैन चालक था।
नौ साल तक चले अदालती प्रक्रिया के बाद उच्चतम न्यायालय ने sibling murder मामले के एकमात्र जीवित आरोपी की मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा। अभियुक्त को निचली अदालत ने भाई-बहन की हत्या के मामले में दोहरे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक २९ अक्टूबर २०१० को दोनों बच्चों का अपहरण घर के पास से उस वक्त हुआ था जब वे स्कूल जाने के लिए कैब का इंतजार कर रहे थे। एक निजी कॉल टैक्सी कंपनी में काम करने वाला मोहन कृष्णन उर्फ मोहन उर्फ मोहनराज अक्सर बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस लाने का काम करता था। इसके कारण बच्चे उससे परिचित थे। लेकिन घटना के कुछ दिनों पहले उसने नौकरी छोड़ दी तब कंपनी ने दूसरे चालक को ड्यूटी पर लगा दिया था। घटना वाले दिन मोहन कृष्णन कैब चालक बनकर ही पहुंचा और बच्चों को अपहृत कर ले गया। कुछ देर बाद मोहन कृष्णन ने बच्चों के पिता को फोन कर कहा कि उसने बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण कर लिया है। पिता की शिकायत पर वैरायटी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।
तत्कालीन पुलिस आयुक्त डॉ सी. शैलेंद्र बाबू के निर्देशन में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो दोनों बच्चों के टिफिन बॉक्स और स्कूल बस्ते पोल्लाची के पास उदमुलपेट में परम्बिकुलम-अलियार परियोजना (पीएपी) नहर के पास मिला। हालांकि, दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन लड़कीके शव पोंगलूर के पास नहर से बराद हुआ जबकि बच्चे का शव दो दिन बाद नहर से बरामद हुआ। दोनों बच्चों की नृशंस हत्या ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था। अपराधियों ने बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ यौन दुराचार भी किया था जबकि बच्चे की हत्या से पहले उसे प्रताडि़त किया गया था। अपराधियों ने दोनों ही हत्या करने के बाद शव को पीएपी नहर में बहा दिया था।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी मोहन कृष्णन और उसके सहयोगी मनोहरन को गिरफ्तार किया था। ९ नवम्बर को २०१० को वारदात स्थल पर ले जाते समय पुलिस अधिकारी का रिवाल्वर छीनकर हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान मोहनकृष्णन मारा गया था। बाद में अदालत ने मोनहरन को दो आरोपों में मृत्युदंड और तीन मामलों में सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में मनोहरन ने मद्रास उच्च न्यायलय मेें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने भी फांसी सजा बरकरार रखी। कोयम्बत्तूर नार्थ इंडियन संगम के अध्यक्ष श्रवण बोहरा ने कहा कि अदालत फैसले से लोगों को संतोष मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसी कठोर सजा से अपराधियों में भय पैदा होगा और ऐसे पर अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। अदालत के फैसले से लोगों में न्याय के प्रति विश्वास पैदा हुआ है कि देरी से ही सही, अपराधी को सजा मिली है।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned