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चैनपुर जलमग्न हुआलोगों के घर सुनार नदी में डूबे

जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते चैनपुरा गांव के दर्जनों घरों में, खेतों में सुनार नदी का पानी भर गया।

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दमोह. जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते चैनपुरा गांव के दर्जनों घरों में, खेतों में सुनार नदी का पानी भर गया। कुछ घर नदी में डूब गए हैं, तो कुछ मकानों का ऊपरी हिस्सा ही नजर आ रहा है। बता दें कि सीतानगर डैम के गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद नरसिंहगढ़ के पास सुनार नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया। जलस्तर बढऩे से डूब क्षेत्र में शामिल चैनपुरा गांव में पानी भर गया। यहां अभी भी कई ग्रामीणों ने गांव नहीं छोड़ा है। पानी भरने बाद अब उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
बता दें कि आमतौर पर नदी का जल स्तर कुछ मीटर ही रहता है, लेकिन इस बार खूब बारिश हुई। डैम लबालब भर गया और अब गेट बंद करने पर यह 11 मीटर से अधिक जल स्तर बढ़ गया। इस मामले में जल संसाधन विभाग के जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वह ये कि समय रहते गांव खाली नहीं कराया। इस खामी के कारण कई घरों में पानी भर गया। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। हालांकि विभाग का दावा है कि सभी प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा और प्लॉट दिए गए हैं। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने अपनी जिद के कारण अभी तक गांव नहीं छोड़ा है। जो अब परेशान हो रहे हैं। हालांकि दावों के बावजूद मौजूदा स्थिति जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
भले ही मुआवजा बंट गया हो, लेकिन गांव में ग्रामीण तो नहीं रह रहे और रह रहे हैं, तो उन्हें कैसे जल्दी बाहर किया जाए, जिम्मेदारों को इस स्थिति का अनुमान लगाना चाहिए था। इसके साथ ही ग्रामीणों को यहां से निकालने के कदम उठाने चाहिए थे। जिस पर जिम्मेदारों ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ी है।

५० फीसदी ग्रामीण गांव में ही बसे

सीतानगर डैम के डूब क्षेत्र में चैनपुरा, बरखेरा चौपरा व बरखेरा नाहर सहित कई गांव शामिल हैं। इनमें चैनपुरा और बरखेरा नाहर डूब क्षेत्र के मुख्य गांव हैं। विस्थापन के बाद भी यहां ५० फीसदी ग्रामीण निवासरत हैं। पहले से शंका थी कि डैम पूरा भरा, तो ये गांव जलमग्न होंगे ही, जो अब सच हो गई है। गांव अब पानी में डूब चुके हैं। 20 से ३0 फीट तक पानी भरने पूरी तरह घर डूब चुके हैं।

अधिकारी बोले. सभी मुआवजा मिला, नहीं हट रहे तो वही जाने

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मानें, तो डूब क्षेत्र के सभी ग्रामीणों को मुआवजा व नई कॉलोनी में प्लॉट आवंटित किए गए हैं। अधिकांश लोग विस्थापित हो चुके हैं, लेकिन कुछ लोग जबरदस्ती गांव में रह रहे हैं। उन्हें नोटिस भी दिए गए हैं, लेकिन गांव खाली नहीं किया। अधिकारियों का कहना है कि अब वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। ग्रामीणों को खुद समझना होगा।

विस्थापित ग्रामीणों की यहां बसी नई बस्ती

विस्थापितों के लिए नरसिंहगढ़ के पास कल्यापुरा नामक नई बस्ती बसाई गई है। यहां बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। जबकि सरकारी रिकार्ड के अनुसार नई बस्ती विस्थापितों के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान प्रदान करा रही है। लेकिन, मौका स्थिति दावों से पूरा उलट है।

वर्जन
सीतानगर डैम में कई गांव डूब क्षेत्र में हैं। इनमें चैनपुरा व बरखेरा नाहर मुख्य हैं। प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा व प्लॉट मिल चुके हैं, लेकिन कुछ लोग जबरदस्ती निवास कर रहे हैं। उन्हें नोटिस देकर गांव खाली करने के लिए कहा, फिर भी वे नहीं माने।
शुभम अग्रवाल, ईई जल संसाधन विभाग दमोह