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देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में विधायक के पति समेत 7 को उम्र कैद, 18 दोषमुक्त

Devendra Chourasiya Hatyakand Verdict: मार्च 2019 देवेंद्र हत्याकांड मामले में विधायक राम बाई के पति समेत 7 को उम्र कैद, 18 आरोपी दोषमुक्त

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दमोह

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Sanjana Kumar

Jan 23, 2026

Devendra Chourasiya Hatyakand Verdict after 6 years

Devendra Chourasiya Hatyakand Verdict after 6 years: 7 आरोपी जिन्हें मिली उम्र कैद(photo:patrika)

Devendra Chourasiya Hatyakand Verdict: बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में हाईकोर्ट ने 25 दोषियों में से पथरिया की पूर्व बसपा विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह परिहार, देवर चंदू सिंह, भाई लोकेश सिंह समेत सात दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है। वहीं, 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है।

फरियादी सोमेश चौरसिया द्वारा सजा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर अपील को भी न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और रामकुमार चौबे की पीठ ने दोषियों की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

6 साल बाद आया फैसला

यह हत्याकांड 15 मार्च 2019 का है, जब एमपी के दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत पटेरा मार्ग स्थित चौरसिया डामर प्लांट पर कांग्रेस नेता व व्यवसायी देवेंद्र चौरसिया पर लाठीड डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

एक साल पहले अपर सत्र न्यायाधीश ने 25 को दी थी आजीवन कारावास की सजा

करीब एक वर्ष पहले अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार कौशिक ने 25 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए दोषसिद्ध आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के परीक्षण के बाद सात दोषियों की सजा कायम रखी।

शीर्ष कोर्ट में याचिका

मार्च 2019 में हटा के देवेन्द्र की हत्या हुई। मामले में विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह, परिजनों को आरोपी बनाया। देवेन्द्र के बेटे ने आरोपियों की पूर्व मामलों में मिली जमानतों को निरस्त करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामबाई के पति और उसके परिजनों को पूर्व के मामलों में मिली सभी जमानतों को रद्द किया था।

कोर्ट ने एमपी सरकार पर भी तीखी टिप्पणी की थी। देवेन्द्र के बेटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी गोविंद सिंह को राजेन्द्र पाठक हत्याकांड, पाठक परिवार के तिहरे हत्याकांड, सतपारा लूट कांड में मिली सभी जमानत रद्द किया था। तब कोर्ट ने मप्र सरकार को कहा था कि सरकार आम आदमी व रसूखदारों के संबंध में कानून के दोहरे मापदंड नहीं अपना सकती।