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नवरात्रि विशेष: कुलदेवी से बड़ी देवी तक ऐसा है मंदिर का इतिहास

हजारी परिवार बना था माध्यम, अब देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में जाना जाता है बड़ी देवी मां मंदिर

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Navratri Special - Famous Badi Devi Temple of Damoh

Navratri Special - Famous Badi Devi Temple of Damoh

दमोह. शक्ति की भक्ति की पर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहा है। शहर के प्रसिद्ध बड़ी देवी मंदिर में रविवार को अलसुबह से ही हजारों भक्त मां जगतजननी के समक्ष माथा टेककर मनोकामना करेंगे। प्रसिद्ध बड़ीदेवी माता मंदिर में मां के दर्शन तो भक्त वर्षों से करते आ रहे हैं, लेकिन मंदिर के रहस्यों के बारे में अधिकांश भक्त नहीं जानते हैं। आज आप पढ़ेंगे मंदिर का पूरा इतिहास।
बड़ी देवी मंदिर की क्या है विशेषता। कब हुई स्थापना। कैसे पड़ा बड़ी देवी मंदिर का नाम। यह सब जानकारी आप तक पहुंचाने के लिए पत्रिका ने दमोह के प्रसिद्ध बड़ी देवी मंदिर पहुंचकर जानकारी जुटाई। करीब चार सौ वर्ष पहले बड़ी देवी मंदिर में देवीजी की स्थापना की गई थी। इसके बाद से अब दूसरी बार मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जिसके लिए भक्तगण बढ़ चढ़कर उत्साह दिखाते है।
मां बड़ी देवी की स्थापना कब हुई थी
बड़ी देवी मंदिर का इतिहास बताता है कि करीब चार सौ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कटहरा गांव से हजारी परिवार दमोह पहुंचा था। परिवार अपनी कुलदेवी मां महालक्ष्मी की मूर्ति लेकर भी लेकर लेकर पहुंचा था। माता की इस मूर्ति की स्थापना फुटेरा तालाब के पास स्थित उनकी ही जमीन पर उन्होंने किया था। इसके साथ ही मां सरस्वती और मां महाकाली की मूर्तियां भी स्थापित की गई थीं। इसके बाद यहां काफी चमत्कार हुए और बड़ी देवी के नाम से मां की प्रतिमा प्रचलित हो गई।
बड़ी देवी मंदिर से खाली हाथ नहीं लौटते भक्त
मां जगतजननी की दमोह के फुटेरा वार्ड स्थित बड़ी देवी मंदिर में मूर्तियों की स्थापना होने के बाद से लेकर लगातार यहां भक्तों का पहुंचना शुरु हुआ।
हजारी परिवार की कुलदेवी के सामने जिस किसी ने भी अपनी कामना रखी। मां जगतजननी ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। कुछ ही समय में लोग हजारी परिवार की कुलदेवी को बड़ी देवी पुकारने लगे और लोग इस मंदिर को बड़ी देवी के मंदिर के नाम से जानने लगे। जो अब देश भर में प्रसिद्ध तीर्थ बड़ी देवी के नाम से प्रचलित है। पूर्व में बड़ी खेरमाई और बगीचा वाली माई के नाम से भी लोग यहां माता के दर्शन करने पहुंचते थे।
मंदिर बनाने का पहला प्रयास हुुआ था असफल
मंदिर के पुजारी पंडित आशीष कटारे ने बताया कि पूर्वजों ने कहा कि करीब दो सौ वर्ष पूर्व छपरट वाले ठाकुर साहब ने मनोकामना पूरी होने पर बड़ीदेवी मंदिर बनाने का प्रयास किया था, लेकिन गुबंद क्षतिग्रस्त होने के बाद काम रोक दिया गया था। इसके बाद 1979 में शहर के बाबूलाल गुप्ता ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। अब नया रूप मंदिर को दिया जा रहा है। जिसके लिए लोग खुलकर दान कर रहे है। जल्द ही बड़ीदेवी मंदिर का आकर्षक स्वरूप देखने मिलेगा।नवरात्र में उमडेगा भक्तों का जनसैलाब
बड़ी देवी मंदिर में वैसे तो हर नवरात्र भक्तों का मेला लगता है। इस शारदीय नवरात्र बड़ी देवी मंदिर समिति द्वारा भक्तों की भीड़ को देखते हुए तैयारी की गईं है। रविवार को घट स्थापना के साथ ही सुबह 4 बजे से लेकर दोपहर 12 तक हजारों भक्त मां के दर्शन लाभ ले रहे है। पंडित आशीष कटारे ने बताया कि भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई है। बेरीकेट्स के माध्यम से भक्तगण बारी-बारी से माता के दर्शनलाभ लेंगे। नवरात्र के दौरान परिसर में हे माता अम्बे, जय जगदंबे का अखंड संकीर्तन शुरू हो गया है, जो नवमीं तक चलेगा। भक्त घटकप्पर जबारे भी अपने नाम से यहीं बुवाते है। शाम को आरती का आयोजन रोजाना किया जाएगा।