
plantation in garden
दमोह. जिले भर में हर साल बारिश का मौसम शुरू होते ही प्रशासन व निजी संस्थाओं द्वारा बढ़ चढ़कर पौधारोपण किया जाता है। हर साल हजारों पौधे बारिश के मौसम में रोपने प्रचार किया किया जाता है। लेकिन सरकारी व गैर सरकारी तौर पर रोपे गए अधिकांश पौधे कभी पेड़ नहीं बन पाते। पौधारोपण करने के बाद इनकी सुरक्षा नहीं की जाती। इससे पौधे रोपने के कुछ सप्ताह बाद ही रोपे गए पौधे का नामोनिशान मिट जाता है। इससे किसी को कोई वास्ता नहीं रहता। हजारों की संख्या में पौधों का पौधारोपण तो कर दिया जाता हैए पर जब इन पौधों के पेड़ बनने की बात आती है तो लगभग 80 फीसदी पौधे गायब रहते हैं। इसके पीछे का कारण पौधारोपण करने के बाद इनकी उचित देखभाल न करना है। पौधा रोपण करने के बाद पौधों के पेड़ बनने तक इनके रख रखाव का संकल्प पौधारोपण करने के बाद ही खत्म हो जाता है। पौधारोपण करने के बाद अधिकांश लोग दोबारा इनकी देखभाल के लिए नहीं पहुंचते। जिससे पौधे का पेड़ बनना संभव नहीं हो पाता है। हर साल लोग उसी स्थान पर फिर से लोग पहुंच जाते हैं, जहां वर्षों से पौधारोपण होता आ रहा है। किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पिछले सीजन के पौधे क्यों खत्म हो गए अथवा पेड़ क्यों नहीं बन पाए। कुल मिलाकर की आगे पाट पीछेे सपाट वाली स्थिति बनी हुई है।
Published on:
10 Jul 2020 11:56 pm
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