
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक फोटो
Terror Of The Bears : भालुओं के हमले की घटना बढ़ने से लोग चिंतित हैं। वन्यजीव-मानव संघर्षों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उत्तराखंड में भालुओं के हमलों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। उत्तराखंड में भालू के बढ़ते हमलों को लेकर आम धारणा बन रही है कि भूख मिटाने के लिए भालू बस्तियों में घुसकर इंसानों को मार रहे हैं और उनका व्यवहार अधिक हिंसक हो गया है। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. सत्य कुमार के अनुसार इस सीजन राज्य में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भालुओं के हमलों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन इनका कारण भोजन नहीं है। भालू सर्वाहारी होते हैं और घास-पत्तियों के साथ मांस भी खाते हैं। उत्तराखंड में पिछले साल इंसानों पर भालुओं के हमलों की सौ से ज्यादा घटनाएं हुईं। विशेषज्ञों में मुताबिक भालू सामान्य तौर पर इंसानों से बचते हैं। जंगलों या आसपास इंसानों से आमना-सामना होने पर वह घबरा जाते हैं। आत्मरक्षा में वह इंसानों पर हमला भी कर देते हैं। इसे शिकार व्यवहार नहीं, बल्कि डिफेंसिव अटैक माना जाता है।
भालुओं के हमलों में उत्तराखंड में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। किसी भी मामले में इंसानी मांस खाने की पुष्टि नहीं हुई है। इससे स्पष्ट है कि भालू बाघ और गुलदार की तरह आदमखोर नहीं बने हैं। यदि हमले भूख के कारण होते, तो इसके प्रमाण भी सामने आते। गढ़वाल के वन संरक्षक आकाश वर्मा के मुताबिक, जंगलों में मानवीय दखल, बस्तियों और सड़कों का विस्तार, प्राकृतिक आवास और भोजन की कमी के चलते भालू जंगल से मानव बस्तियों में घुस रहे हैं। इंसानों का डर उनमें पहले से ही बसा हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में भालुओं द्वारा मवेशियों का मांस खाए जाने की घटना जरूर सामने आईं हैं, लेकिन इंसानी मांस खाने की पुष्टि नहीं हुई है।
Published on:
14 Jan 2026 10:23 am
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