
आने वाले दशकों में भारत में 20 से 75 दिन तक भीषण गर्मी पड़ेगी
Scientists' Warning : आने वाले दशकों में भारत को 20 से 75 दिन तक की भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वर्ष 2041 से वर्ष 2070 के बीच देश के कई हिस्सों में 20 से 75 दिन तक अत्यधिक तापीय तनाव (हीट स्ट्रेस) झेलना पड़ सकता है। चेतावनी दी गई है कि हीट स्ट्रेस वाले दिनों में बीती सदी की तुलना में करीब 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। साल 2025 में महसूस की गई अत्यधिक गर्मी और उमस उस खतरे की केवल आहट है। वैज्ञानिकों ने ताजा शोध में बताया है कि आने वाले वर्षों में 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक हीट इंडेक्स वाले दिनों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी, जिससे हीट स्ट्रोक, थकान और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना तक बढ़ जाएगा। शोधकर्ताओं ने भविष्य के जलवायु परिदृश्यों का आकलन करने के लिए अत्याधुनिक जलवायु मॉडलों और हाई रिजॉल्यूशन डेटा का उपयोग किया।
तापमान और आर्द्रता को लेकर हीट इंडेक्स पर हुए इस पहले राष्ट्रस्तरीय अध्ययन से पता चलता है कि भारत के तटीय, मैदानी और उत्तरी क्षेत्रों में गर्मी का असर अलग-अलग रूपों में सामने आएगा। वर्ष 2041 से वर्ष 2070 की अवधि में 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक हीट इंडेक्स वाले दिनों की संख्या 1971-2000 की तुलना में औसतन 50 दिन तक बढ़ सकती है, जबकि 32 डिग्री से अधिक के खतरनाक दिनों में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा। सदी के अंत यानी 2071-2100 तक उच्च उत्सर्जन परिदृश्य के तहत यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
राजस्थान के फलोदी में 19 मई 2016 को अधिकतम तापमान 51 डिग्री रिकार्ड किया गया। ये भारत का सर्वाधिक तापमान है। राजस्थान के श्रीगंगानगर, चुरु और उड़ीसा के टिटलागढ़ में भी 48 डिग्री से ऊपर तापमान दर्ज किया जा चुका है। 2017-2021 की अवधि में राष्ट्रीय हीटवेव मृत्यु दर में लगभग 55% वृद्धि 1901-2016 के दौरान भारत में लगभग 0.64 सेल्सियस तापमान बढ़ा, 1980 के बाद इसमें तेज वृद्धि हुई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सर्दियों में तटीय क्षेत्रों और गर्मियों में उत्तर भारत के हिस्सों में हीट स्ट्रेस के दिन सबसे अधिक होंगे। यह बदलाव बढ़ते तापमान और क्षेत्रीय स्तर पर बदलती आर्द्रता के संयुक्त प्रभाव से हो रहा है। शोध में यह भी रेखांकित किया गया है कि कुछ जलवायु मॉडल गर्मियों की चरम स्थितियों को कुछ हद तक कम आंकते हैं, जबकि वास्तविक जोखिम इससे अधिक हो सकता है। यदि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को काबू नहीं किया गया तो आने वाले दशकों में स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, ऊर्जा की मांग पर गंभीर दबाव पड़ेगा।
Updated on:
02 Feb 2026 08:00 am
Published on:
02 Feb 2026 07:59 am

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