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MP के एक गांव की कहानी: 23 साल में तीन बार ही बांध पाई भाई को राखी

त्योहारों पर जहां दूसरे गांवों में लोग खुशियां मनाते हैं वहीं इस गांव के ज्यादातर घरों में केवल रस्म अदायगी होती है।

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Kaushlendra Singh

Aug 29, 2015

Rakhi

Rakhi

देवास। देवास (मप्र) से करीब 35 किमी दूर स्थित मोरुखेड़ी गांव की आबादी करीब डेढ़ हजार है। 250 घरों वाले गांव की नई पहचान 'सैनिक गांव' के रूप में है। यहां के 38 युवा सेना में हैं। त्योहारों पर जहां दूसरे गांवों में लोग खुशियां मनाते हैं वहीं इस गांव के ज्यादातर घरों में केवल रस्म अदायगी होती है। इसकी वजह सैनिकों का त्योहारों पर छुट्टी न मिलना है। सैनिकों के साथ उनका परिवार भी त्याग कर रहा है। कई बहनें ऐसी हैं जिन्हें 22-23 साल हो गए भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांध पाईं हैं। डाक से राखी भेजकर और फोन से बात करके ही त्योहार की खुशी बांट ली जाती है।

हर रक्षाबंधन पर आने का वादा करते हैं...

भाई कैलाश 2003 से फौज में है। 12-13 साल हो गए। हर बार राखी पर आने का वादा करते हैं, लेकिन नहीं आ पाते हंै। लिफाफे में राखी के रूप में अपना प्यार-दुलार भेज देती हूं। जब तक सेना में नहीं थे, हर साल कलाई पर राखी बांधती थी। इन12 साल में दो बार ही राखी बांध पाई हूं।
- रचना चौधरी

कई साल बाद आए तो यादगार बना दिन

भाई वृंदावन 23 साल से सेना में हैं। इन सालों में सिर्फ तीन बार रक्षाबंधन पर घर आए हैं। राखी के दिन बस फोन कर देते हैं। काफी अरसे बाद पिछले साल भइया राखी पर घर आए थे। कई साल बाद पूरा परिवार इकट्ठा हुआ। यादगार दिन रहा।
- चंदा व उर्मिला चौधरी

गर्व है अपने भाई पर

हर बहन चाहती है कि रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधे। 22 साल हो गए भाई रामचंद्र मुकाती को फौज में गए। इस दौरान बस चार बार राखी बांध सकी। पिछली बार पांच साल पहले आए थे। देश सेवा कर रहे भाई पर गर्व है।
- रेखा

डाक से राखी भेज मना लेती हूं त्योहार

डाक से राखी भेजना तो आदत बन गई है। भाई को 22 साल में सिर्फ 3 बार ही राखी बांध पाई हूं। दूसरी महिलाओं को राखी पर भाइयों के घर सज-धजकर जाते देखती हूं तो अपने भाई की याद आ जाती है।
- सीमा

रक्षाबंधन पर एक हुए थे हिंदू-मुस्लिम

लॉर्ड कर्जन ने वर्ष 1905 में फूट डालो और राज करो की नीति पर मुस्लिम आबादी वाले हिस्से को अलग करते हुए बंगाल को दो हिस्सों में बांट दिया था। इस बंगभंग के विरोध में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने बंगाल की जनता को रक्षाबंधन का त्योहार हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के रूप में मनाने का आह्वान किया। इसके बाद हिंदू-मुस्लिमों ने एकजुट होकर विरोध किया जिससे ब्रिटिश सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा।

मेवाड़ में मनाई जाती थी 'कर्मेती राखी'

मेवाड़ (उदयपुर) की रानी कर्णावती के मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजने के प्रसंग बिना रक्षाबंधन का जिक्र अधूरा सा लगता है। यह त्योहार पहले देश की रक्षा के अर्थ में मनाया जा था। देश सेवा के लिए राखी किसी को भी बांधी जा सकती थी। यही वजह थी कि चितौड़ की रानी कर्मवती या कर्णावती (1534-1535) ने हुमायूं को राज्य रक्षा के लिए राखी भेजी थीं। ये कथा इतनी प्रचलित हुई कि मेवाड़ में कई वर्षों तक 'कर्मेती राखी' त्योहार मनाया जाता रहा। लोग कर्णावती को कर्णेती भी कहते थे। इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार रानी कर्णावती ने भी राज्य व बहनों के सम्मान के लिए रक्षासूत्र हुमायूं को भेजा था। हुमायूं भी राखी का मान रखते हुए आया था पर तब तक देर हो गई थी। वह मदद नहीं कर पाया।

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