
स्वयं की भूल सुधारने से जीवन सार्थक
कोयम्बत्तूर. जैन मुनि हितेशचंद्र विजय ने कहा है कि जीवन में व्यक्ति सदैव दूसरों की गलतियां ढूंढने का प्रयास करता रहता है। दुनिया की भूल सुधारने के बजाय वह स्वयं की भूल सुधार ले तो जीवन सार्थक होगा। यदि हम बुरा देखते हैं तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा। मुनि रविवार को सुपाश्र्वनाथ जैन आराधना भवन में धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में पुण्य का उदय है तो दुनिया आपको परास्त नहीं कर सकती। यदि पाप का उदय है तो दुनिया आप को उठा नहीं सकती।
मुनि ने कहा कि नकारात्मक सोच में उलझने से पहले सफलता व असफलता के पैमाने को परख लेना चाहिए। जीवन में अच्छे -बुरे दिन कर्मों का फल है। बुरे दिन में निराश न हो ।अच्छे दिन में खुश न हो ।सकारात्मक सोच के लिए पुरुषार्थ व परिश्रम करना ही होगा। तभी सफलता कदम चूमेगी।
उन्होंने कहा कि निर्धन व्यक्ति फुटपाथ पर भी चैन से सोता है जबकि अमीर आदमी ने अपनी नींद गंवा दी है।
इसका तात्पर्य है अमीर बनें लेकिन ईमानदारी व परिश्रम से। लक्ष्य पाने के लिए सतत चलना जरुरी है। भाग्य निर्माण के लिए श्रेष्ठ विचार व निर्मल भाव रखने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि स्त्री का धर्म के प्रति सम्मान होता है। इसलिए उसे धर्म पत्नी कहते हैं। मातृ शक्ति भोजन बनाते समय पवित्र भाव रखे मन हल्का होगा व अन्नपूर्णा देवी की कृपा बनी रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान राजेन्द्र सूरी भक्त मंडल की ओर से गुरू वंदना कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। नृत्य नाटिका का मंचन किया गया।
Published on:
22 Jul 2019 11:28 am
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