
अम्बर अग्निहोत्री
Rajasthan Samachar : धौलपुर. एक गांव ऐसा भी जो सालों से पुरानी परंपरा का आज भी हर साल खुशी से निभाता आ रहा है। गांव की पुराना रिवाज आज भी स्थानीय महिलाएं व पुरुष निर्वाहन कर रहे हैं। गांव आस्था के चलते हुए साल में एक दिन घर में चूल्हा नहीं जलाते है। सभी लोग अपने-अपने खेतों में पहुंचकर चिलचिलाती धूप में भोजन पकाते हैं। समय बदलता गया लेकिन ग्रामीणों ने आस्था को नहीं बदला। वह आज भी पुरानी परंपरा को अपने बच्चों को बताते हुए निभा रहे हैं। जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव लुहारी में लगभग 200 साल पुरानी परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है।
गांव के लोग हर साल बखूबी से निभाते आ रहे हैं। इस रीति को जीवित रखने के लिए युवा भी परिवार के साथ पहुंचते हैं। यह परंपरा को पूरा गांव निभाता है। गांव के लोग वैशाख माह के अंतिम सोमवार को घरों से रसोई का सामान, बर्तन लेकर खेतों की ओर रुख करके वहां पर पहुंचते हैं।
फिर चिलचिलाती धूप में महिलाएं हाथ से चूल्हा बनाकर खेतों में दाल, रोटी, खीर, लड्डे तैयार करती है। जो गांव के रहने वाले बाबा रामपुरी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह नजारा अनूठा दिखाई देता है। बाहर रहने वाले भी इस दिन गांव में आकर इस आयोजन में परिवार सहित शामिल होकर बाबा रामपुरी की परंपरा को बखूबी निर्वाह कर रहे हैं। सोमवार को भी इस परंपरा को निभाया गया।
Dholpur News :कोविड से गांव में नहीं हुई कोई परेशानी
गांव के बुजुर्ग का दावा है कि कोरोना में जहां हर कोई इस संक्रमण से परेशान था। वहीं गांव के लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई है। आठ से दस लोग संक्रमित हुए थे वह भी कुछ ही दिनों में सहीं हो गए थे। पुरानी पंरपरा को लोग निभा रहे हैं। जिससे लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
लुहारी गांव में जब से शादी होकर आई हूं। हर साल इस पुरानी परंपरा को निभाते चले आ रहे है। अपने बच्चों को भी साल में एक दिन साथ ले जाकर पूजा-अर्चना करके प्रसाद लगाते हैं। राजकुमारी, महिला, लुहारी
पुरानी परंपरा चली आ रही हैं जिसको पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं। हर साल एक दिन गांव में किसी के घर पर चूल्हा नहीं जलता है। खेतों में जाकर भोजन बनाकर पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करते है। विमल कुमार शर्मा, ग्रामीण
Rajasthan News :200 साल की परपरा आज भी चल रही
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 200 वर्ष पहले गांव के ही बाबा रामपुरी ने गांव के एक जगह पर समाधि लेने से पूर्व ग्रामीणों से कहा था कि साल में एक दिन घर से बाहर भोजन बनाकर गरीब असहाय को खिलाएं। ऐसा करने से गांव में प्राकृतिक आपदा से बचाव रहेगा। ओलावृष्टि से फसल को नुकसान नहीं होगा। अगर गांव के किसी घर में आग लग जाएगी तो वह दूसरे घरों में नहीं फैलेगी और स्वत: ही बुझ जाएगी। बाबा की कही बातों पर ग्रामीण आज भी आस्था के साथ भरोसा जताते हैं। साल भर में अगर किसी के घरों में इस दिन शादी समारोह, धार्मिक कार्यक्रम इत्यादि आयोजन होते हैं तो उस दिन ही सुबह खेतों में आकर सबसे पहले दाल अंगा बनाकर बाबा को भोग चढ़ाकर शुभ कार्य प्रारंभ किए जाते हैं।
Rajasthan News In Hindi :एक नजर में गांव लुहारी
- लुहारी गांव में लगभग 400 मकान
- गांव में 1900 के करीब मतदाता
- गांव की आबादी 3500 के करीब
Published on:
21 May 2024 03:04 pm
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