आयरन की अधिकता के चलते हैण्डपंप के पानी का नहीं कर रहे उपयोग
डिंडोरी. सरकार के लाख दावों के बाद भी बैगाचक क्षेत्र में जल जीवन मिशन आकार नहीं ले सका है। विगत दिनों से बैगाचक में पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। जनपद पंचायत करंजिया के ग्राम पंचायत पंडरीपानी के पोषक ग्राम लदरादादर में विभागीय अमले ने पेयजल उपलब्धता के प्रयास किए लेकिन बैगाचक के बैगा आदिवासियों को शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पाया। हाल ही में बैगा परिवारों द्वारा झिरिया के गंदे पानी से प्यास बुझाने का मामला प्रकाश में आया था। पेयजल को लेकर आज भी ग्रामीणों को मशक्कत करनी पड़ रही है। लादरा दादर की महिलाएं मूललू बाई, तेजी बाई, मंगली बाई, कली बाई और भुखी बाई से पानी की समस्या और व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि गांव में 6 नल है इनमें से एक नल का पानी ही उपयोगी है जबकि कुछ नल सूखे पड़े हैं और कुछ नलो के पानी में आयरन की मात्रा अधिक है। आयरन की मात्रा अधिक होने की वजह से भोजन के स्वाद में परिवर्तन हो जाता है इस वजह से इसका उपयोग नहीं करते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासनिक अमला जमीनी स्तर पर इस समस्या को गंभीरता से लेकर जल्द निराकरण करे, जिससे हमें भी शुद्ध पानी मिल सके। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें पानी के लिए 2 किलोमीटर दूर झिरिया में जाना पड़ता है। जहां वह पानी लेने जाते हैं वह छत्तीसगढ़ बार्डर से लगा हुआ है और वहीं से पीने का पानी लाकर लदरा दादर के वाशिंदे उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्हें गांव के लोगों से विवाद भी करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वह लंबे समय से पेय जलसंकट से जूझ रहे हैं। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं आज दिनांक तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ।
धरातल पर नहीं हो पाया क्रियान्वयन
जिले में नल-जल योजना के तहत घर-घर पानी पहुंचाने का दावा खोखला साबित हो रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि शासन नल-जल योजना व जल जीवन मिशन का धरातल पर क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाकर विभागीय अमला अधिकारियों को गुमराह करने में लगा हुआ है। जनपद एवं तहसील मुख्यालय बजाग में पिछले एक माह से जल जीवन मिशन के तहत मिलने वाला पानी बंद है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक स्थानों पर जल जीवन मिशन का संचालन सिर्फ कागजो में हो रहा है। ऐसे में लोग इसके लाभ से वंचित हैं।
विभाग दे रहा गलत जानकारी
क्षेत्र में अनेक स्थानों पर लगातार पानी की समस्या बढ रही है। इसके बाद भी विभागीय अमले ने चुप्पी साध रखी है। अपने आप को बचाने विभागीय अमले ने अधिकारियों को आंकड़ो की बाजीगरी में उलझा रखा है। उच्चाधिकारियों को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने जल संकट को गंभीरता से लिया तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने गलत जानकारी प्रेषित कर दी। जबकि 6 नल में से 3 नल पूरी तरह बंद है और दो अन्य नल में आयरन की मात्रा के चलते अनुपयोगी है। लदरादादर के ग्रामीणों की मांग के बाद भी शुद्ध पानी नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े कर रहा है।