
आजकल मार्केट में 1 रुपये का नोट भले ही बेहद कम दिखाई देने लग गया हो लेकिन यह एक ऐतिहासिक नोट है जिससे कई सारे रोचक तथ्य जुड़े हुए हैं। 1 रुपये के नाट को आज से ठीक 100 साल पहले यानी 1917 को ब्रिटिश शासन में जारी किया गया था। अब 1 रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है। आपको बता दें कि 1 रुपए के नोट की छपाई 1926 में बंद कर दी गई थी। इसके बाद इसे फिर से 1940 में छापना शुरु किया गया। इसके बाद इसको 1994 तक लगातार छापा गया। लेकिन उसके बाद इस नोट की छपाई 2015 में शुरु की गई।
— आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 1 रुपये का नाम अन्य भारतीय नोटों की तरह भारतीय रिजर्व बैंक जारी नहीं करता बल्कि इसको भारत सरकार ही इसकी छपाई करके जारी करती है।
— 1 रुपये के नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर नहीं होता बल्कि भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।
— कानूनी आधार पर 1 रुपए का नोट ही वास्तविक ‘मुद्रा’ नोट (करेंसी नोट) है। इसके अलावा सब नोट धारीय नोट (प्रॉमिसरी नोट) होते हैं जिन पर धारक को उतनी राशि अदा करने का वचन दिया जाता है।
— आजादी से पहले 1 रुपये के नोट पर ब्रिटिश सरकार के तीन वित्त सचिवों के हस्ताक्षर होते थे। इनमें एमएमएस गुब्बे, एसी मैकवाटर्स और एच. डेनिंग नाम शामिल हैं।
— आजादी से लेकर अब तक भारत सरकार 18 वित्त सचिवों के हस्ताक्षर वाले एक रुपये के नोट जारी कर चुकी है।
— पिछले 100 साल में 1 रुपये के नोट की डिजाइन 28 बार बदली जा चुकी है।
— 1949 में 1 रुपये के नोट से किंग जॉर्ज पंचम की फोटो को हटाकर उस पर शेर और अशोक चिन्ह की तस्वीर लगाई गई।
— 1 रुपये के नोट के छपाई की लागत अधिक होने पर 1994 में इसकी छपाई बंद कर दी गई थी। लेकिन इसको 2015 में फिर शुरू किया गया।
— 1 रुपए के नोट के अलावा अन्य सभी नोट भारतीय रिजर्व बैंक जारी करती है।
Published on:
14 Dec 2017 10:49 am
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