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जंगल की बेटी : अबूझमाड़ में फैलाएगी शिक्षा की रौशनी

जंगल की बिटियां विमला न सिर्फ पढ़ाई पूरी कर नक्सलियों के गढ़ अबूझमाड़ में लौटना चाहती है, बल्कि दूसरे बच्चों को भी शिक्षा का ज्ञान बांटना चाहती है।

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Satya Narayan Shukla

Apr 08, 2016

Daughter of the Jungle

Daughter of the Jungle : Abujhmad spread education in the light of

दुर्ग.
नक्सलियों से जूझ रहे बस्तर की कल्पना मात्र से जहां दिलो-दिमाग में सिहरन दौड़ जाती है, वहीं नक्सलियों की हिंसा के कारण घर और मां-बाप को छोड़कर सरकारी सहायता पर शिक्षा लेने को मजबूर जंगल की बिटियां विमला न सिर्फ पढ़ाई पूरी कर नक्सलियों के गढ़ अबूझमाड़ में लौटना चाहती है, बल्कि नक्सली हिंसा के कारण शिक्षा से दूर दूसरे बच्चों को भी शिक्षा का ज्ञान बांटना चाहती है।


संघर्ष की कहानी

शिक्षा की जिद में विशेष पिछड़ी जनजाति की विमला कश्यप की अबूझमाड़ के जंगल से निकलकर शहर तक पहुंचना भी किसी संघर्ष की कहानी से कम नहीं है। नक्सलियों के भय से गांव के स्कूल में शिक्षक ही नहीं आते। पुलिस और सेना की मदद से स्कूल में नाम दर्ज कराने वालों की केवल परीक्षा करा ली जाती। ऐेसी स्थिति में मिडिल की पढ़ाई पूरी कर विमला किसी तरह नारायणपुर पहुंची।


दुर्ग के विज्ञान विकास केंद्र में रहकर पढ़ाई

यहां सरकारी हॉस्टल में रहकर लगन और मेहनत से बारहवीं की परीक्षा 63 फीसदी अंकों के साथ पास करने में सफल रही। इसका लाभ विमला को सरकारी खर्चे पर आगे की पढ़ाई की सुविधा के रूप में मिली। इसी के तहत वे दुर्ग के विज्ञान विकास केंद्र में रहकर पढ़ाई कर रही है। वे इस बार बीेएससी सेकंड ईयर का एक्जाम दे रही है।


पांच भाई-बहनों के साथ बच्चों को पढ़ाने की इच्छा

अशिक्षा के कारण जीवन के संघर्षों को अपनी आंखों से देखकर निकली विमला पढ़ाई पूरी कर शिक्षक बनकर अबूझमाड़ वापस लौटना चाहती है। यहां शिक्षकों के नहीं आने के कारण शिक्षा से वंचित अपने पांच भाई-बहनों के साथ गांव के दूसरे बच्चों को शिक्षा का ज्ञान बांटना चाहती है।


जज्बा देख प्रभारी सचिव भी प्रभावित

विमला के शिक्षा के प्रति जुनून को गांव में जाकर शिक्षा का अलख जगाने की जूनन से जिले के प्रभारी सचिव एनके असवाल भी बेहद प्रभावित हैं। प्रभारी सचिव विज्ञान विकास केंद्र पहुंचे तो उन्होंने विमला से उनकी भविष्य को लेकर सोच के बारे में पूछा। इस पर विमला ने बेहद सधे हुए अंदाज अंग्रेजी में प्रभारी सचिव से बात की और शिक्षक बनकर गांव लौटने की इच्छा जताई।

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